नयी दिल्ली, 24 अगस्त (भाषा) दिल्ली और उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में हाल के हफ्तों में एच1एन1 इन्फ्लूएंजा के मामले बढ़े हैं। विशेषज्ञ लोगों (खासकर संक्रमण से जटिलताओं के अधिक जोखिम वाले लोगों) को सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं, लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया है कि इस वायरस के अधिक खतरनाक होने का कोई सबूत नहीं है।
‘पीटीआई वीडियो’ से बातचीत में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की पूर्व मुख्य वैज्ञानिक और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की पूर्व महानिदेशक डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने कहा कि एच1एन1 इन्फ्लूएंजा का एक ज्ञात स्वरूप है और यह कोई नया वायरस नहीं है।
डॉ. स्वामीनाथन ने कहा, ‘इस बात का कोई सबूत नहीं है कि वायरस में कोई बड़ा एंटीजेनिक बदलाव हुआ है या यह अधिक खतरनाक हो गया है।’ उन्होंने कहा कि मामलों में हालिया बढ़ोतरी मौसमी इन्फ्लूएंजा की गतिविधि के अनुरूप है, खासकर मॉनसून और सर्दियों के महीनों के दौरान।
वर्ष 2009 में स्वाइन फ्लू महामारी का कारण बने इस वायरस का स्वरूप दुनियाभर में फैल रहा है।
स्वामीनाथन ने कहा कि ज्यादातर लोग पर्याप्त आराम, तरल पदार्थों का सेवन और लक्षणों के आधार पर उपचार से ठीक हो जाते हैं।
हालांकि, बुजुर्गों, बच्चों (खासकर पांच साल से कम उम्र के बच्चों), गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों में संक्रमण के कारण जटिलताओं का खतरा अधिक रहता है।
स्वामीनाथन ने बताया कि सांस लेने में तकलीफ, होंठ या नाखूनों का नीला पड़ना, खाने-पीने में असमर्थता, होश की अवस्था में परिवर्तन, तेज सांस चलना, उल्टी या बच्चों में असामान्य चिड़चिड़ापन जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के पूर्व निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा कि दिल्ली में फिलहाल एच1एन1 के मामले बढ़ रहे हैं, लेकिन मानसून के कमजोर पड़ने के साथ इनमें कमी आने की उम्मीद है।
उन्होंने लोगों (खासकर अधिक जोखिम वाले समूहों के लोगों) को इन्फ्लूएंजा संक्रमण से बचाव के लिए सावधानी बरतने की सलाह दी।
भाषा
शुभम नरेश
नरेश