कर्नाटक में ‘जाति जनगणना’ की तारीख 31 अक्टूबर तक बढ़ाई गई: डीके शिवकुमार

कर्नाटक में ‘जाति जनगणना’ की तारीख 31 अक्टूबर तक बढ़ाई गई: डीके शिवकुमार

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  • Publish Date - October 19, 2025 / 09:21 PM IST,
    Updated On - October 19, 2025 / 09:21 PM IST

बेंगलुरु, 19 अक्टूबर (भाषा) कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने रविवार को कहा कि सरकार ने सामाजिक एवं शैक्षिक सर्वेक्षण को पूरा करने की तारीख 31 अक्टूबर तक बढ़ाने का फैसला किया है।

इस सर्वेक्षण को व्यापक रूप से ‘जाति जनगणना’ भी कहा जा रहा है।

उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण की शेष अवधि के दौरान शिक्षकों को गणना कार्य के लिए नहीं लगाया जाएगा।

कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा किया जा रहा यह सर्वेक्षण 22 सितंबर को शुरू हुआ था और मूल रूप से सात अक्टूबर को समाप्त होना था।

राज्य सरकार ने हालांकि बाद में सर्वेक्षण की तारीख को 18 अक्टूबर तक बढ़ाने का फैसला किया था और शासकीय व सहायता प्राप्त विद्यालयों में दशहरा की छुट्टियों को भी 18 अक्टूबर तक बढ़ाने का फैसला किया था ताकि गणना करने वालों के रूप में तैनात शिक्षकों की मदद से सर्वेक्षण पूरा किया जा सके।

मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने रविवार को वरिष्ठ मंत्रियों, अधिकारियों और कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष मधुसूदन आर. नाइक के साथ सर्वेक्षण की प्रगति पर एक बैठक की अध्यक्षता की।

शिवकुमार ने कहा, “बेंगलुरू दक्षिण, बीदर, धारवाड़ को छोड़कर राज्य के अन्य सभी हिस्सों में सर्वेक्षण का लगभग 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और यह अच्छी तरह से किया गया है। बेंगलुरु शहर में 67 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है, जिसमें से 20 प्रतिशत ने जानकारी नहीं दी है। हमने सर्वेक्षण की तारीख को 31 अक्टूबर तक बढ़ा दिया है। अब से हम गणना कार्य के लिए शिक्षकों को नहीं लगाएंगे।”

उन्होंने पत्रकारों से कहा, “दीपावली के त्योहार के मद्देनजर 20, 21 और 22 अक्टूबर को छुट्टी रहेगी। गणना कार्य में लगे अन्य सरकारी कर्मचारियों को सर्वेक्षण पूरा करने के लिए लगाया जाएगा। ऑनलाइन सर्वेक्षण के विकल्प उपलब्ध होंगे, जिनका उपयोग कोई भी कर सकता है।”

शिवकुमार ने कहा, “यह सर्वेक्षण 31 अक्टूबर तक चलेगा। मैं सभी समुदायों के लोगों से अनुरोध करता हूं कि वे इस अवसर को न चूकें और सर्वेक्षण में भाग लें तथा प्रश्नों के उत्तर दें।’’

समय सीमा बढ़ाने से पहले इस सर्वेक्षण पर 420 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान था।

भाषा जितेंद्र प्रशांत

प्रशांत