कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने आरएसएस की विचारधारा को विभाजनकारी बताया
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने आरएसएस की विचारधारा को विभाजनकारी बताया
बेंगलुरु, 12 नवंबर (भाषा) कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने बुधवार को आरएसएस की आलोचना करते हुए इसकी विचारधारा को विभाजनकारी बताया।
उन्होंने कहा कि वह सदैव कुरुबा समुदाय के साथ खड़े रहे हैं, जिससे वह संबंधित हैं, तथा उन्होंने कुरुबा संघ के लिए कागिनेले पीठ की स्थापना के वास्ते कड़ी मेहनत की।
सिद्धरमैया ने कहा, ‘‘मैंने सभी उत्पीड़ित समुदायों की आवाज़ के रूप में कागिनेले पीठ की स्थापना की। मैंने हमेशा सनातनवादी आरएसएस, जाति अनुक्रम और अंधविश्वास का विरोध किया है।’’
वह गांधीनगर में कर्नाटक कुरुबा संघ के नए भवन और छात्रावास की आधारशिला रखने के बाद बोल रहे थे।
उन्होंने कहा, ‘‘मेरा स्पष्ट उद्देश्य कुरुबा समुदाय के बच्चों के लिए शिक्षा और छात्रावास की सुविधा सुनिश्चित करना है। आरएसएस की विचारधारा समाज को विभाजित करती है और जाति व्यवस्था को बनाए रखती है। यह एक ऐसी विचारधारा है जो श्रमिक वर्गों का विरोध करती है। यही कारण है कि मैंने शुरू से ही आरएसएस का विरोध किया है। इसी दृढ़ विश्वास के साथ मैंने प्रस्ताव रखा कि कागिनेले पीठ सभी उत्पीड़ित समुदायों का केंद्र बने।’’
मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि कुरुबा संघ लंबे समय से 100 साल पुराने ढांचे को ध्वस्त कर नए भवन के निर्माण की मांग कर रहा था।
उन्होंने कहा, ‘‘सभी से परामर्श के बाद पुराने ढांचे को ध्वस्त कर दिया गया है और नए भवन की नींव रख दी गई है। गुणवत्ता से समझौता किए बिना निर्माण कार्य 18 महीनों के भीतर पूरा कर लिया जाएगा।’’
सिद्धरमैया के अनुसार, पुराने छात्रावास में पढ़ने वाले कई लोग अधिकारी और यहां तक कि न्यायाधीश भी बन गए हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं 1983 में विधायक और 1984 में मंत्री बना। परिवहन मंत्री के रूप में, मैंने 1988 में संत और कवि कनकदास की 500वीं जयंती का आयोजन किया था। तब मैंने निर्णय लिया था कि समुदाय के पास एक गुरुपीठ होनी चाहिए। उस समय एसोसिएशन पर तीन करोड़ रुपये का कर्ज था, जिसे हमने चुका दिया। यह इतिहास है और सभी को इसे समझना चाहिए।’’
मुख्यमंत्री ने कहा कि नए भवन में एक छात्रावास भी होगा।
भाषा नेत्रपाल पवनेश
पवनेश

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