कर्नाटक के मुख्यमंत्री का मलयालम भाषा विधेयक पर रुख ‘गलत’: मंत्री पी राजीव

कर्नाटक के मुख्यमंत्री का मलयालम भाषा विधेयक पर रुख ‘गलत’: मंत्री पी राजीव

कर्नाटक के मुख्यमंत्री का मलयालम भाषा विधेयक पर रुख ‘गलत’: मंत्री पी राजीव
Modified Date: January 10, 2026 / 03:19 pm IST
Published Date: January 10, 2026 3:19 pm IST

तिरुवनंतपुरम, 10 जनवरी (भाषा) केरल के कानून मंत्री पी. राजीव ने राज्य सरकार की ओर से प्रस्तावित मलयालम भाषा विधेयक पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के रुख को शनिवार को ‘गलत’ ठहराया।

संवाददाताओं से बातचीत में राजीव ने कहा कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री के विचार संभवतः उस पुराने मलयालम भाषा विधेयक पर आधारित है, जिसे राष्ट्रपति की मंजूरी नहीं मिली थी।

कानून मंत्री ने कहा कि राज्य द्वारा प्रस्तावित नए विधेयक में तमिल और कन्नड़ भाषी अल्पसंख्यकों को अपनी मातृभाषा में अध्ययन करने की अनुमति दी गई है और इन क्षेत्रों में आधिकारिक संचार भी उनकी भाषाओं में होगा।

 ⁠

उन्होंने कहा कि नए विधेयक के तहत इन क्षेत्रों के छात्रों के लिए मलयालम पढ़ना वैकल्पिक है। राजीव ने कहा, ‘‘ये प्रावधान पुराने विधेयक में नहीं थे और हमें उस समय इस संबंध में आपत्तियां मिली थीं। इसलिए, हमने नए विधेयक का मसौदा तैयार करते समय इसे भी ध्यान में रखा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए कर्नाटक के मुख्यमंत्री के विचार पुराने विधेयक के प्रावधानों पर आधारित प्रतीत होते हैं। उन्होंने गलत रुख अपनाया है, संभवतः कांग्रेस नेतृत्व के निर्देशों पर।’’

मंत्री ने कहा कि जब सदन में नया विधेयक पेश किया गया था तब विपक्षी कांग्रेस शबरिमला स्वर्ण विवाद के विरोध में सदन के बाहर बैठी थी, इसलिए शायद उन्हें इसके विषयवस्तु की जानकारी नहीं थी।

राजीव ने कहा, ‘‘अन्यथा जब कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने विधेयक का विरोध किया, जो राज्य की सामूहिक भावना है, तो विपक्ष का यह दायित्व था कि वह उन्हें बताए कि भाषाई अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा की गई है।’’

सिद्धरमैया ने बृहस्पतिवार को मलयालम भाषा विधेयक का विरोध किया और केरल से अपने ‘दबावपूर्ण रवैये’ को वापस लेने और भारत की संवैधानिक नैतिकता का पालन करने का आग्रह किया था।

सिद्धरमैया ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘प्रस्तावित मलयालम भाषा विधेयक-2025, कन्नड़ माध्यम के स्कूलों में भी मलयालम को पहली भाषा के रूप में अनिवार्य करके, भाषाई स्वतंत्रता और केरल के सीमावर्ती जिलों, विशेष रूप से कासरगोड की वास्तविकता पर सीधा प्रहार करता है।’’

शुक्रवार को उन्होंने केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को पत्र लिखकर विधेयक पर गंभीर चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने कहा कि यदि विधेयक पारित होता है, तो कर्नाटक भाषाई अल्पसंख्यकों और देश की बहुलतावादी भावना की रक्षा के लिए उपलब्ध हर संवैधानिक अधिकार का प्रयोग करते हुए इसका विरोध करेगा।

भाषा संतोष रंजन

रंजन


लेखक के बारे में