बेंगलुरु, दो सितंबर (भाषा) कर्नाटक कांग्रेस ने बुधवार को यहां फ्रीडम पार्क में प्रदर्शन कर, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने का विरोध किया। यह प्राथमिकी उत्तराखंड में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली वाले स्थल पर कथित शुद्धीकरण अनुष्ठान को लेकर राहुल गांधी की टिप्पणी के संबंध में दर्ज की गई है।
यह प्रदर्शन कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के अध्यक्ष बी. के. हरिप्रसाद के नेतृत्व में किया गया। इसमें कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया समेत पार्टी के अन्य नेता एवं पदाधिकारी शामिल हुए।
प्रदर्शनकारियों ने हाथों में ‘संविधान विरोधी भाजपा’, ‘भाजपा जातिवादी पार्टी है’ और ‘बदले की राजनीति’ जैसे नारे लिखी तख्तियां ले रखी थीं।
उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तराखंड के भाजपा नेताओं के दबाव में राहुल गांधी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।
कांग्रेस नेताओं ने इसे बदले की राजनीति करार देते हुए प्राथमिकी तत्काल वापस लेने की मांग की।
कांग्रेस नेताओं ने उत्तराखंड में कथित रूप से ‘दोषी’ भाजपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज करने और उनके खिलाफ तुरंत कानूनी कार्रवाई करने की मांग की।
राहुल गांधी के खिलाफ यह प्राथमिकी उत्तराखंड के हल्द्वानी में वाल्मीकि समुदाय के एक सदस्य की शिकायत पर दर्ज की गई थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि कांग्रेस नेता ने पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कार्यक्रम स्थल पर हुए धार्मिक अनुष्ठान को जातिगत रंग देने की कोशिश की।
हल्द्वानी के रामलीला मैदान में आठ अगस्त को खरगे की जनसभा के बाद 11 अगस्त को कुछ लोगों द्वारा कथित तौर पर ‘शुद्धीकरण’ किए जाने पर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया।
वहीं अरुणाचल प्रदेश में भी कांग्रेस ने बुधवार को ईटानगर में विरोध मार्च निकाला और उत्तराखंड में एक कार्यक्रम स्थल पर कथित जाति आधारित ‘शुद्धिकरण’ अनुष्ठान को लेकर दिए गए बयान के संबंध में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी वापस लेने की मांग की।
अरुणाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एपीसीसी) ने ईटानगर में राजीव गांधी भवन से विरोध मार्च निकाला, जिसमें पार्टी के नेताओं, पदाधिकारियों, निर्वाचित प्रतिनिधियों, कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने हिस्सा लिया।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि प्राथमिकी विपक्ष की आवाज दबाने की एक कोशिश थी और उन्होंने भाजपा-आरएसएस पर जातिवाद, छुआछूत और भेदभाव को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।
भाषा
शुभम मनीषा
मनीषा