कर्नाटक : विपक्ष के नेता अशोक ने अपशिष्ट प्रबंधन निविदा पर सवाल उठाए, सीबीआई जांच की मांग की

कर्नाटक : विपक्ष के नेता अशोक ने अपशिष्ट प्रबंधन निविदा पर सवाल उठाए, सीबीआई जांच की मांग की

कर्नाटक : विपक्ष के नेता अशोक ने अपशिष्ट प्रबंधन निविदा पर सवाल उठाए, सीबीआई जांच की मांग की
Modified Date: June 15, 2026 / 06:54 pm IST
Published Date: June 15, 2026 6:54 pm IST

बेंगलुरु, 15 जून (भाषा) कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने सोमवार को आरोप लगाया कि राज्य सरकार की 39,437 करोड़ रुपये की प्रस्तावित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन निविदा बेंगलुरु के निवासियों पर दीर्घकालिक वित्तीय बोझ डालेगी। उन्होंने मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की मांग की।

विधान सौध में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में अशोक ने दावा किया कि वह किसी भी जांच के लिए तैयार हैं और निविदा प्रक्रिया की सीबीआई से जांच कराने की मांग पहले ही कर चुके हैं।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता अशोक ने कहा, “मैं पहले ही कह चुका हूं कि मैं किसी भी जांच के लिए तैयार हूं। मैंने पहले ही सीबीआई से जांच कराने की मांग कर दी है। मैं सीबीआई को सभी दस्तावेज देने के लिए तैयार हूं। लेकिन अनुमति किसे देनी है? राज्य सरकार को।”

उन्होंने बेंगलुरु के निवासियों, रेजिडेंट वेल्फेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) और नागरिक समाज संगठनों से परियोजना के खिलाफ पत्र अभियान शुरू करने और राज्यपाल तथा मुख्यमंत्री को पत्र लिखने का आग्रह किया।

अशोक ने 39,437 करोड़ रुपये के घोटाले का पर्दाफाश करने का दावा करते हुए कहा कि यह परियोजना निवासियों पर दशकों तक वित्तीय बोझ डालेगी। उन्होंने कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाया कि दो साल से भी कम समय का कार्यकाल बचा होने के बावजूद वह लंबी अवधि की परियोजना को मंजूरी दिलाने की कोशिश कर रही है।

अशोक ने दावा किया, “यह मामला सिर्फ बेंगलुरु के अगले 30 महीनों के भविष्य से नहीं, बल्कि 30 वर्षों के भविष्य से जुड़ा हुआ है। भले ही सत्ता में मौजूद लोगों के कार्यकाल में अब सिर्फ 23 महीने बचे हों, लेकिन वे ऐसी परियोजना के लिए निविदा आमंत्रित कर रहे हैं, जो शहर को 30 साल या उससे भी ज्यादा समय के लिए बांध देगी।”

अशोक ने प्रस्तावित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन परियोजना में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए कहा, “ऐसा लगता है कि कांग्रेस ने कचरे से पैसे कमाने का तरीका ढूंढ लिया है। कांग्रेस आलाकमान के लिए यह शायद राजनीतिक बोझ हो, लेकिन बेंगलुरु के लोगों के लिए यह नुकसान है।”

भाजपा नेता ने बताया कि उन्होंने राज्यपाल और एक उच्चस्तरीय समिति को ज्ञापन सौंपकर निविदा की जांच करने और परियोजना का निष्पक्ष एवं सटीक मूल्यांकन करने का अनुरोध किया है।

अशोक ने परियोजना के विरोध के पीछे राजनीतिक मकसद होने की बात खारिज की। उन्होंने कहा, ‘‘डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री रहने या न रहने से मुझे कोई निजी फायदा या नुकसान नहीं है। मेरी चिंता यह है कि कचरे से जुड़ा यह बोझ बेंगलुरु के लोगों पर न डाला जाए।’’

बिदादी टाउनशिप के लिए प्रस्तावित जमीन अधिग्रहण पर अशोक ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार “किसानों की चिंताओं को नजरअंदाज कर रही है और बड़े पैमाने पर विरोध के बावजूद परियोजना को आगे बढ़ा रही है।”

बेंगलुरु दक्षिण जिले के बिदादी में प्रस्तावित ‘ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप’ (जीबीआईटी) मुख्यमंत्री शिवकुमार की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक है, जिसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर आधारित भारत की पहली इंटीग्रेटेड टाउनशिप के तौर पर पेश किया जा रहा है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, इस परियोजना के तहत इलाके के नौ गांवों की लगभग 7,481 एकड़ जमीन शामिल होने की उम्मीद है।

भाषा पारुल सुरेश

सुरेश


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