आरएसएस पर अपमानजनक टिप्पणी करने के आरोप में कर्नाटक के मंत्रियों और युवा कांग्रेस नेता को नोटिस
आरएसएस पर अपमानजनक टिप्पणी करने के आरोप में कर्नाटक के मंत्रियों और युवा कांग्रेस नेता को नोटिस
बेंगलुरु, छह जनवरी (भाषा) एक विशेष अदालत ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और उसके सदस्यों को बदनाम करने वाले बयान देने के आरोप में कर्नाटक के मंत्रियों प्रियंक खरगे, दिनेश गुंडू राव तथा युवा कांग्रेस नेता मोहम्मद हारिस नलपाद को नोटिस जारी करने का आदेश दिया है।
जन प्रतिनिधियों से संबंधित मामलों की सुनवाई करने वाली विशेष अदालत ने हाल ही में आरएसएस सदस्य और स्थानीय निवासी तेजस ए द्वारा दायर एक शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 356(2) के तहत नोटिस जारी करने का निर्देश दिया था।
इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए ग्रामीण विकास और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री प्रियंक खरगे ने मंगलवार को ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि ‘‘आरएसएस देश के विकास में सबसे बड़ी बाधा है।’’
उन्होंने कहा, “कुछ लोग कठपुतलियों का इस्तेमाल कर हमारे खिलाफ मामले दर्ज करवा रहे हैं, क्योंकि हम आरएसएस को लेकर जायज सवाल उठा रहे हैं।”
शिकायतकर्ता के अनुसार अक्टूबर में खरगे ने मुख्यमंत्री को एक पत्र लिखकर स्कूल और मैदानों सहित सरकारी परिसरों में आरएसएस की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने का अनुरोध किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री ने बाद में सोशल मीडिया पर आरएसएस के खिलाफ अपमानजनक पोस्ट किए।
मंत्री दिनेश गुंडू राव पर भी सोशल मीडिया और टेलीविजन मीडिया से बातचीत के दौरान इसी तरह की टिप्पणियां करने का आरोप है।
नलापाद पर एक सोशल मीडिया चैनल पर आरएसएस और उसके सदस्यों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने का आरोप है।
अदालत ने नोटिस जारी करने का आदेश दिया और अगली सुनवाई के लिए 14 जनवरी की तारीख तय की। अदालत ने उन कानूनी प्रावधानों का हवाला दिया जिनके अनुसार कथित अपराधों का संज्ञान लेने से पहले आरोपियों की सुनवाई अनिवार्य है।
खरगे ने अपने पोस्ट में इस बात पर प्रकाश डाला कि आरएसएस प्रमुख मोहन भगवत ने कहा था कि संगठन अपने स्वयंसेवकों द्वारा दिए गए दान से चलता है।
खरगे ने सवाल किया, ‘‘ये स्वयंसेवक कौन हैं और उनकी पहचान कैसे होती है? दिए गए दान का पैमाना क्या है? ये दान किन तंत्रों या माध्यमों से प्राप्त होते हैं…व्यापक राष्ट्रीय उपस्थिति और प्रभाव के बावजूद आरएसएस अब भी पंजीकृत क्यों नहीं है?’’
भाषा अविनाश पवनेश
पवनेश

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