कार्ति चिदंबरम ने चीनी वीजा मामले में अभियोग तय करने के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया
कार्ति चिदंबरम ने चीनी वीजा मामले में अभियोग तय करने के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया
नयी दिल्ली, 15 जनवरी (भाषा) कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने कथित चीनी वीजा घोटाले में उनके खिलाफ भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश के आरोप तय किए जाने को चुनौती देते हुए बृहस्पतिवार को दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया। इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) कर रही है।
चिदंबरम की याचिका न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत में सूचीबद्ध की गई है और इस पर 19 जनवरी को सुनवाई होगी।
सीबीआई ने अक्टूबर 2024 में कार्ति चिदंबरम और अन्य के खिलाफ वर्ष 2011 में बिजली कंपनी तलवंडी साबो पावर लिमिटेड (टीएसपीएल) के लिए चीनी नागरिकों के वीजा की सुविधा प्रदान करने में कथित रिश्वतखोरी के मामले में आरोपपत्र दाखिल किया था। 2011 में कार्ति के पिता पी. चिदंबरम केंद्रीय गृह मंत्री थे।
एक अधीनस्थ अदालत ने 23 दिसंबर 2025 को इस मामले में कार्ति चिदंबरम और छह अन्य लोगों के खिलाफ आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार के अभियोग तय करने का आदेश दिया था।
अधीनस्थ अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया कार्ति चिदंबरम के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी (आपराधिक साजिश) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 8 (भ्रष्ट या अवैध साधनों से किसी लोक सेवक को प्रभावित करने के लिए रिश्वत लेना) तथा धारा 9 (लोक सेवक पर व्यक्तिगत प्रभाव डालने के लिए रिश्वत लेना) के तहत आरोप तय करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं।
तमिलनाडु के शिवगंगा से लोकसभा सांसद कार्ति चिदंबरम ने उच्च न्यायालय में दाखिल अपनी याचिका में कहा कि अधीनस्थ अदालत ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री और दस्तावेजों पर विचार करते समय न्यायिक विवेक का प्रयोग नहीं किया और उन दस्तावेजों, साक्ष्यों तथा गवाहों के बयानों की पूरी तरह अनदेखी की, जिनसे यह साबित होता हो कि कोई अपराध हुआ ही नहीं था।
याचिका में कहा गया है कि जांच एजेंसी द्वारा लगाए गए आरोपों के विपरीत, न तो कोई रिश्वतखोरी हुई और न ही कोई आपराधिक साजिश रची गई।
अधिवक्ता अक्षत गुप्ता के माध्यम से दाखिल याचिका में कहा गया, ‘‘किसी भी मामले में आरोपी द्वारा धन या उसके समकक्ष लाभ की मांग, भुगतान और स्वीकृति का प्रमाण होना आवश्यक है। माननीय अधीनस्थ अदालत ने यह गलत टिप्पणी की है कि याचिकाकर्ता ने काम के लिए 50 लाख रुपये की मांग की थी। याचिकाकर्ता द्वारा ऐसी किसी मांग का आरोप तक नहीं है, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष प्रमाण तो दूर की बात है।’’
सीबीआई ने वर्ष 2022 में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर लगभग दो वर्षों तक की गई जांच के बाद आरोपपत्र दाखिल किया था। एजेंसी का आरोप है कि पंजाब की कंपनी टीएसपीएल 1,980 मेगावाट का ताप विद्युत संयंत्र स्थापित कर रही थी और इसका काम चीनी कंपनी शेडोंग इलेक्ट्रिक पावर कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन (एसईपीसीओ) को ‘आउटसोर्स’ किया गया था।
भाषा धीरज खारी
खारी

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