कश्मीर बलिदान दिवस: नेताओं ने ‘घरों में नजरबंद’ किये जाने का दावा किया

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कश्मीर बलिदान दिवस: नेताओं ने ‘घरों में नजरबंद’ किये जाने का दावा किया

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  • Publish Date - July 13, 2024 / 10:49 PM IST,
    Updated On - July 13, 2024 / 10:49 PM IST

श्रीनगर, 13 जुलाई (भाषा) जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने शनिवार को मुख्यधारा के राजनीतिक दलों की 1931 में आज ही के दिन एक डोगरा शासक की सेना द्वारा मारे गए 22 कश्मीरी लोगों को श्रद्धांजलि देने की योजना को विफल कर दिया। प्रशासन ने उन्हें मार्च निकालने से रोक दिया और कई नेताओं को नजरबंद कर दिया।

पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती समेत कई नेताओं ने दावा किया कि प्रशासन ने उन्हें घरों में नजरबंद कर दिया और ‘शहीदों की मजार’ पर श्रद्धांजलि देने नहीं जाने दिया।

इन नेताओं के दावों पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा ने आरोप लगाया कि श्रीनगर के बाहरी इलाके खिम्बेर में उन्हें उनके घर में ‘नजरबंद’ कर दिया गया।

उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘ मेरे घर के द्वार एक बार फिर बंद कर दिए गए हैं, ताकि मैं मजार-ए-शुहादा पर न जा सकूँ – जो निरंकुशवाद, दमन और अन्याय के खिलाफ कश्मीर के प्रतिरोध का एक स्थायी प्रतीक है।’’

पीडीपी प्रमुख ने कहा, ‘‘हमारे शहीदों का बलिदान इस बात का प्रमाण है कि कश्मीरियों के जज्बे को कुचला नहीं जा सकता’’। उन्होंने कहा, ‘‘आज ही के दिन शहीद हुए प्रदर्शनकारियों की शहादत की याद करना भी आज अपराध बन गया है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘पांच अगस्त, 2019 को जम्मू-कश्मीर को विखंडित कर दिया गया, शक्तिहीन कर दिया गया और वह सब कुछ छीन लिया गया, जो हमारे लिए पवित्र था। उनका हमारी प्रत्येक सामूहिक स्मृति को मिटाने का इरादा है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन इस तरह के हमले अपने अधिकारों और सम्मान के लिए लड़ाई जारी रखने के हमारे दृढ़ संकल्प को और मजबूत ही करेंगे।’’

केंद्र ने पांच अगस्त, 2019 को अनुच्छेद 370 को निरस्त कर दिया था और पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित कर दिया था।

अलगाववादी से मुख्यधारा के नेता बने और पीपुल्स कांफ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद लोन ने भी दावा किया कि उन्हें भी घर में नजरबंद कर दिया गया है।

लोन ने ‘एक्स’ पर कहा,‘‘बिना किसी कारण के मुझे घर में नजरबंद कर दिया गया है। मैं वास्तव में यह समझने में असफल हूं कि लोगों को शहीदों के कब्रिस्तान पर जाने से रोकने से प्रशासन को क्या मिलेगा।’’

उन्होंने कहा कि लोगों को अपना नायक चुनने का अधिकार है और ‘‘शहीद कश्मीर के लोगों के नायक हैं।’’

कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रांतीय अध्यक्ष नासिर असलम वानी के निवास के द्वार भी पुलिस ने बंद कर दिये।

वानी ने कहा, ‘‘हमें शहीदों की कब्रों पर श्रद्धांजलि देने से रोकने के लिए गेट बंद कर दिया गया है और पुलिस कर्मियों को तैनात कर दिया गया है। मुझे समझ नहीं आ रहा है कि ऐसा क्यों किया गया। हम हमेशा उनके बलिदानों को याद रखेंगे।’’

पार्टी के मुख्य प्रवक्ता तनवीर सादिक, युवा शाखा के अध्यक्ष सलमान सागर और अन्य ने भी इसी तरह के दावे किए।

भाषा राजकुमार दिलीप

दिलीप