जम्मू में कश्मीरी पंडितों का प्रदर्शन : पुनर्वास नीति और रोजगार पैकेज की मांग

जम्मू में कश्मीरी पंडितों का प्रदर्शन : पुनर्वास नीति और रोजगार पैकेज की मांग

जम्मू में कश्मीरी पंडितों का प्रदर्शन : पुनर्वास नीति और रोजगार पैकेज की मांग
Modified Date: May 9, 2026 / 06:02 pm IST
Published Date: May 9, 2026 6:02 pm IST

जम्मू, नौ मई (भाषा) कश्मीर घाटी से विस्थापित कश्मीरी पंडितों ने शनिवार को जम्मू में विरोध प्रदर्शन किया और समुदाय को दोबारा घाटी में बसाने के लिए एक व्यापक पुनर्वास नीति तैयार करने और उसे लागू करने की मांग की।

प्रदर्शनकारियों ने साथ ही प्रधानमंत्री के विशेष पैकेज के तहत 15,000 शिक्षित विस्थापित युवाओं के लिए एक नए रोजगार पैकेज की घोषणा करने की भी मांग की।

यूथ ऑल इंडिया कश्मीरी समाज (वाईएआईकेएस) के बैनर तले वापसी और पुनर्वास, रोजगार के अवसर और उचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व सहित अपनी मांगों के समर्थन में तख्तियां लिए और नारे लगाते हुए प्रदर्शनकारी यहां प्रेस क्लब के बाहर एकत्र हुए।

इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व वाईएआईकेएस के अध्यक्ष आर के भट ने किया। उन्होंने कहा कि समुदाय अपनी लंबे समय से लंबित मांगों को पूरा करवाने के लिए एक बार फिर सड़कों पर उतरा है।

भट ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार से लगभग 37 वर्षों के विस्थापन का दंश झेल रहे कश्मीरी पंडितों की उनकी ‘मातृभूमि’ में वापसी की सहूलियत देने की अपील की।

उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘हमारा मानना ​​है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण से कश्मीरी पंडितों को न्याय और उचित पुनर्वास मिलना चाहिए। हम प्रधानमंत्री से अपील करते हैं कि वे घाटी में पूरे समुदाय के लिए एक व्यापक वापसी और पुनर्वास पैकेज तैयार करें।’’

भट ने कहा कि समुदाय को प्रधानमंत्री, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन पर पूरा भरोसा है।

उन्होंने कहा, ‘‘कश्मीरी पंडित समुदाय आज से सड़कों पर उतरे हैं। यह वही संगठन है, जिसने 2010 में कश्मीरी पंडित युवाओं को कश्मीर घाटी लौटने के लिए प्रेरित किया था। आज भी वह आंदोलन एक अलग रूप में जारी है।’’

भट ने सरकार से समुदाय के समक्ष एक ठोस पुनर्वास प्रस्ताव रखने का आग्रह किया और कहा कि इसमें युवाओं के लिए रोजगार के अवसर, अधिक उम्र के इच्छुक व्यक्तियों और राहत के प्रावधान, साथ ही विस्थापन के दौरान खोए गए अधिकारों और आजीविका की बहाली शामिल होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि अगर उचित मुआवजा, बुनियादी ढांचा और रोजगार सहायता सुनिश्चित की जाए, तो लगभग 15,000 कश्मीरी पंडित युवा घाटी लौटने के लिए तैयार हैं।

भाषा धीरज दिलीप

दिलीप


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