कठुआ बलात्कार-हत्या: अदालत ने आजीवन कारावास की सजा निलंबित करने के अनुरोध वाली याचिका खारिज की
कठुआ बलात्कार-हत्या: अदालत ने आजीवन कारावास की सजा निलंबित करने के अनुरोध वाली याचिका खारिज की
चंडीगढ़, 18 मार्च (भाषा) पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने कठुआ में 2018 में आठ वर्षीय बच्ची के साथ हुए बलात्कार और हत्या मामले के मुख्य साजिशकर्ता एवं मंदिर के पूर्व सेवादार सांझी राम की याचिका खारिज करते हुए कहा है कि ‘इस स्तर पर सजा के निलंबन की रियायत’ नहीं मिलनी चाहिए।
जनवरी 2018 में जिस मंदिर में अपराध हुआ था, उसके सेवादार सांझी राम को अगले वर्ष पठानकोट की एक सत्र अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। सांझी राम के रिश्तेदार परवेश कुमार और विशेष पुलिस अधिकारी दीपक खजूरिया को भी आजीवन कारावास की सजा सुनायी गई थी।
न्यायमूर्ति गुरविंदर सिंह गिल और न्यायमूर्ति रमेश कुमारी की खंडपीठ ने सांझी राम की याचिका पर 6 मार्च को यह आदेश पारित किया। तीन पृष्ठ का यह आदेश इस सप्ताह की शुरुआत में उपलब्ध कराया गया।
मामले के गुणदोष पर टिप्पणी किए बिना, अदालत ने कहा कि उसकी राय में ‘यह ऐसा मामला नहीं है जिसमें याचिकाकर्ता/अपीलकर्ता इस स्तर पर सजा के निलंबन की रियायत का हकदार हो।’’
अदालत ने कहा, ‘‘इस प्रकार, आवेदन खारिज किया जाता है।’’
अप्रैल 2018 में जम्मू कश्मीर अपराध शाखा द्वारा दायर 15 पृष्ठों के आरोपपत्र के अनुसार, बंजारा लड़की का उसी वर्ष 10 जनवरी को अपहरण कर लिया गया था और जम्मू के कठुआ क्षेत्र के एक छोटे से गांव के मंदिर में उसे बंधक बनाकर बलात्कार किया गया था। मंदिर की देखभाल सांझी राम द्वारा की जाती थी। आरोपपत्र में कहा गया है कि उसे चार दिनों तक बेहोश रखा गया और बाद में उसकी हत्या कर दी गई।
सांझी राम की आजीवन कारावास की सजा निलंबित करने की दलील देते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता विनोद घई ने उच्च न्यायालय के समक्ष कहा कि अभियोजन पक्ष ने 114 गवाहों से जिरह की, लेकिन राम की संलिप्तता साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि राम पहले ही आठ साल से अधिक का समय जेल में काट चुका है और सजा के निलंबन का हकदार है।
जम्मू कश्मीर राज्य की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आर एस चीमा और पीड़ित परिवार की ओर से अधिवक्ता मनदीप सिंह बसरा और अनुपिंदर बराड़ पेश हुए थे।
भाषा अमित नरेश
नरेश

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