कोच्चि, आठ मार्च (भाषा) केरल के कैथोलिक चर्च के एक प्रमुख निकाय ‘केरल कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस’ (केसीबीसी) ने रविवार को शराब की दुकानों की बढ़ती संख्या और शराबखोरी तथा नशीली दवाओं के दुरुपयोग के खिलाफ कथित निष्क्रियता को लेकर राज्य सरकार की आलोचना की।
केसीबीसी के मद्यनिषेध आयोग ने एक परिपत्र जारी किया जिसे राज्य भर के कैथोलिक चर्चों में पढ़ा गया।
आयोग के अध्यक्ष बिशप एम्ब्रोस पुथेनवेत्तिल ने परिपत्र में कहा कि केरल में कैथोलिक चर्च के 32 धर्मप्रांतों में शराब और नशीली दवाओं के खिलाफ कदम उठाए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘एक ओर जहां चर्च और सामाजिक संगठन शराब और नशीली दवाओं के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं वहीं अधिकारी अक्सर इन्हें नियंत्रित करने या रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई करने में विफल रहते हैं।’’
केसीबीसी ने कहा कि शराब की उपलब्धता कम करने के वादों के बावजूद शराब की दुकानों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है।
आयोग ने कहा कि इसी के साथ एमडीएमए जैसे मादक पदार्थ और गांजा जैसे खतरनाक नशीले पदार्थों का उपयोग बढ़ा है। सरकारी आकलन संकेत देते हैं कि लगभग 1,400 स्कूल नशीली दवाओं की गतिविधियों का मुख्य केंद्र बन गए हैं।
परिपत्र में कहा गया, ‘‘शराब और नशे के दुष्परिणामों ने समाज को बुरी तरह प्रभावित किया है। परिवार टूट रहे हैं। बंद दरवाजों के पीछे माताएं सिसकती रहती हैं। बच्चे खौफ के साए में जीते हैं। प्यार से बने घर संघर्ष, हिंसा और यहां तक कि हत्या के केंद्र बन जाते हैं।’’
केसीबीसी ने कहा, ‘‘चर्च को बच्चों और युवाओं को नशे की लत से बचाने और उनके भविष्य को सुनिश्चित करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करना चाहिए।’’
केसीबीसी ने रविवार को ‘मद्यनिषेध और नशा विरोधी दिवस’ मनाया। इसके तहत राज्य भर के विभिन्न चर्चों में आयोग द्वारा कई कार्यक्रम आयोजित किए गए।
भाषा प्रचेता सुरभि
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