तिरुवनंतपुरम, सात अगस्त (भाषा) केरल के मत्स्य पालन मंत्री वी. ई. अब्दुल गफूर के कार्यालय द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार पिछले 11 वर्षों में राज्य के तट से समुद्र में मछली पकड़ने गए 469 मछुआरों की मौत हुई, जबकि 160 अन्य लापता हो गए।
यह जानकारी ऐसे समय सामने आयी है जब हाल में दो मछुआरों के लापता होने की घटनाओं को लेकर तटीय समुदाय में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं।
मत्स्य मंत्री के कार्यालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 2015-16 से 2025-26 के दौरान केरल समुद्री मत्स्य विनियमन (केएमएफआर) के तहत 23,000 गश्ती अभियान चलाए गए और 5,072 समुद्री बचाव अभियान संचालित किए गए।
इन 11 वर्षों के दौरान 47,773 मछुआरों को सुरक्षित बचाया गया।
आंकड़ों के अनुसार, 2017-18 में सबसे अधिक 79 मछुआरों की मौत दर्ज की गई। इसके बाद 2025-26 में 55 और 2023-24 में 54 मछुआरों की मौत हुई।
इसी तरह, 2017-18 में एक वर्ष में सबसे अधिक 29 मछुआरे लापता हुए, जबकि 2016-17 और 2021-22 में 26-26 मछुआरे लापता हुए।
वर्ष 2025-26 में 55 मछुआरों की मौत हुई, जबकि तीन मछुआरे लापता बताए गए हैं।
मत्स्य मंत्री के कार्यालय ने ये आंकड़े ऐसे समय जारी किए हैं, जब राज्य में हाल ही में 26 वर्षीय युवक सहित दो मछुआरों के लापता होने की घटनाओं को लेकर तटीय समुदाय में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।
अधिकारियों ने बताया कि पुतेंथुरा के रहने वाले गौतम कृष्णा की तलाश के लिए तटीय पुलिस ने शुक्रवार को अभियान तेज कर दिया। वह 31 जुलाई को पुतेंथुरा के निकट एक मछली पकड़ने वाली नौका के पलट जाने के बाद से लापता हैं।
नींदाकरा तटीय पुलिस थाने के अधिकारियों ने बताया कि गौतम की तलाश के लिए अतिरिक्त नौकाएं और पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। इस हादसे में गौतम के पिता राधाकृष्णन (48) और दादा राजीवन (74) की मौत हो गयी थी, जो उसी नौका में सवार थे।
उधर, विझिंजम तटीय पुलिस 31 जुलाई को तिरुवनंतपुरम तट के निकट एक अलग नौका दुर्घटना में लापता हुए पुल्लुविला निवासी जॉन (54) की तलाश भी जारी रखे हुए है।
जॉन के परिजनों ने हाल ही में विझिंजम तटीय पुलिस थाने के बाहर प्रदर्शन किया और आरोप लगाया कि तलाशी अभियान प्रभावी ढंग से नहीं चलाया जा रहा है।
भाषा गोला मनीषा
मनीषा