केरल विधानसभा चुनाव : एलडीएफ की नजर ‘हैट्रिक’ बनाने पर, यूडीएफ वापसी की आस में

केरल विधानसभा चुनाव : एलडीएफ की नजर ‘हैट्रिक’ बनाने पर, यूडीएफ वापसी की आस में

केरल विधानसभा चुनाव : एलडीएफ की नजर ‘हैट्रिक’ बनाने पर, यूडीएफ वापसी की आस में
Modified Date: April 8, 2026 / 08:42 pm IST
Published Date: April 8, 2026 8:42 pm IST

(तस्वीरों के साथ)

तिरुवनंतपुरम, आठ अप्रैल (भाषा) केरल में बृहस्पतिवार को होने वाले विधानसभा चुनाव में 2.71 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे।

इस मुकाबले में सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) के लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटने तथा विपक्षी संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) की सत्ता से वनवास खत्म होने की संभावना और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के राज्य में अपना खाता खोलने के प्रयासों की परख होगी।

लगभग एक महीने के गहन चुनाव प्रचार के बाद इस दक्षिणी राज्य में कल एक ही चरण में विधानसभा चुनाव होंगे। सभी 140 विधानसभा क्षेत्रों में सुबह सात बजे से शाम छह बजे तक मतदान होगा, जहां 883 उम्मीदवार मैदान में हैं।

निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, मतदाताओं में 1.32 करोड़ पुरुष, 1.39 करोड़ महिलाएं और 273 उभयलिंगी हैं। साथ ही 2.42 लाख से अधिक प्रवासी मतदाता भी हैं।

हालांकि यह मुकाबला त्रिकोणीय है। लेकिन राज्य में सत्ता मुख्य रूप से एलडीएफ और यूडीएफ के बीच हस्तांतरित होती रही है। इस चुनाव के परिणाम से पता चलेगा कि क्या यह पैटर्न बरकरार रहेगा या इसमें बदलाव आयेगा।

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ एलडीएफ के लिए यह चुनाव लगातार तीसरी बार सत्ता बरकरार रखने की एक अहम लड़ाई है।

मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के नेतृत्व में, वाम मोर्चा ने अपने 10 साल के शासन रिकॉर्ड को प्रमुखता दी है, जिसमें बुनियादी ढांचा विकास, कल्याणकारी योजनाएं और संकट प्रबंधन शामिल हैं।

हालांकि, एलडीएफ को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिनमें सत्ता विरोधी लहर की चर्चा और 2024 के लोकसभा चुनाव और हाल के स्थानीय निकाय चुनाव में मिली हार के बाद उठे सवाल शामिल हैं।

वाममोर्चा ने निरंतरता, स्थिरता और कामकाज का दावा करते हुए इन आरोपों का मुकाबला करने की कोशिश की है। उसने भ्रष्टाचार और कुशासन के आरोपों को भी खारिज कर दिया है।

इस बीच, कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ को केरल में सत्ता में वापसी का एक बड़ा अवसर दिख रहा है। उसे केरल के परिवर्तनकारी मतदान पैटर्न और मौजूदा सरकार के प्रति जनता की असंतुष्टि पर भरोसा है।

उसने अपना चुनाव प्रचार शासन, कथित भ्रष्टाचार और विजयन प्रशासन के कामकाज के तरीके जैसे मुद्दों पर केंद्रित किया है।

यूडीएफ ने माकपा और भाजपा के बीच मिलीभगत का आरोप लगाकर अपने राजनीतिक संदेश को और भी तीखा बनाने का प्रयास किया है। उसने वामपंथियों पर एसडीपीआई जैसे संगठनों से संबंध रखने का भी आरोप लगाया है, जो प्रतिबंधित इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) की राजनीतिक शाखा है।

भाजपा के नेतृत्व वाले राजग के लिए, यह चुनाव केरल की राजनीति में विस्तार के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। लगातार चुनावों में अपने वोट प्रतिशत में सुधार के बावजूद यह गठबंधन अब तक विधानसभा में एक भी सीट हासिल करने में विफल रहा है।

राजग ने खुद को एलडीएफ और यूडीएफ दोनों के विकल्प के रूप में पेश किया है। उसने तर्क दिया है कि राज्य में किसी भी मोर्चे के तहत पर्याप्त विकास नहीं हुआ।

भाषा राजकुमार अविनाश

अविनाश


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