सरकारी कर्मचारियों के तबादलों पर केरल विधानसभा में हंगामा, एलडीएफ ने लगाए राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप

सरकारी कर्मचारियों के तबादलों पर केरल विधानसभा में हंगामा, एलडीएफ ने लगाए राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप

सरकारी कर्मचारियों के तबादलों पर केरल विधानसभा में हंगामा, एलडीएफ ने लगाए राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप
Modified Date: June 3, 2026 / 12:25 pm IST
Published Date: June 3, 2026 12:25 pm IST

तिरुवनंतपुरम, तीन जून (भाषा) केरल में सरकारी कर्मचारियों के तबादलों को लेकर बुधवार को विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। विपक्षी वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) ने आरोप लगाया कि तबादले राजनीतिक कारणों से किए जा रहे हैं, जबकि सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह प्रशासनिक सुविधा के लिए नियमित प्रक्रिया के तहत किए गए हैं।

मुख्यमंत्री वी डी सतीशन की ओर से जवाब देते हुए संसदीय कार्य मंत्री सनी जोसेफ ने कहा कि कर्मचारियों के तबादले मौजूदा नियमों और 2017 के सरकारी आदेश के अनुसार किए जा रहे हैं।

इस मुद्दे पर चर्चा के लिए एलडीएफ की ओर से लाए गए कार्य स्थगन प्रस्ताव का समर्थन करते हुए मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) विधायक वी जॉय ने आरोप लगाया कि महिलाओं, सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच चुके कर्मचारियों, कैंसर रोगियों और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों तक को दूर-दराज के क्षेत्रों में स्थानांतरित किया जा रहा है।

उन्होंने दावा किया कि सरकार के गठन के बाद से 33 विभागों ने 207 तबादला आदेश जारी किए हैं, जिनके तहत लगभग 1,952 कर्मचारियों का तबादला किया गया है। इनमें 310 महिलाएं भी शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ये तबादले ‘‘राजनीतिक रूप से प्रेरित’’ हैं।

जॉय ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ कर्मचारी संगठनों की मांग पर तबादले किए जा रहे हैं और नए मंत्रियों के करीबी अधिकारियों को महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त किया गया है। उन्होंने मंत्रियों के निजी स्टाफ में रिश्तेदारों की नियुक्ति का भी आरोप लगाया।

माकपा विधायक ने दावा किया कि सरकार द्वारा किए गए कुछ तबादलों पर प्रशासनिक न्यायाधिकरण ने रोक लगाई है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने आशा कार्यकर्ताओं को सत्ता में आते ही मानदेय 21,000 रुपये करने का वादा करके गुमराह किया और मुनंबम क्षेत्र के निवासियों को भी भूमि विवाद का त्वरित समाधान करने का आश्वासन दिया था।

इन आरोपों को खारिज करते हुए मंत्री जोसेफ ने कहा कि तबादले प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने और रिक्तियों को भरने के उद्देश्य से किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘यदि किसी कर्मचारी को अपने तबादले से शिकायत है तो वह सरकार से संपर्क कर सकता है। सरकार उसकी शिकायत पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी।’’

जोसेफ ने आरोप लगाया कि वाम मोर्चा शासन के दौरान कई कर्मचारियों के तबादले बिना दिशा-निर्देशों का पालन किए किए गए थे और कुछ कर्मचारी एक ही पद पर एक दशक तक बने रहे।

उन्होंने कहा, ‘‘हम आपको आदर्श नहीं मानते। हम एक संतुष्ट और सक्षम सिविल सेवा चाहते हैं और उसी दिशा में कदम उठाए गए हैं।’’

मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि एलडीएफ शासन के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री और मंत्रियों की सोशल मीडिया पर आलोचना करने वाले 41 सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ निलंबन सहित कार्रवाई की गई थी।

विधानसभा अध्यक्ष तिरूवंचूर राधाकृष्झान ने कार्य स्थगन प्रस्ताव की अनुमति नहीं दी। इसके बाद विपक्ष के नेता पिनराई विजयन ने सदन से बहिर्गमन (वॉकआउट) करने से पहले कहा कि तबादले निजी हितों को साधने के लिए किए गए हैं और इससे जनता को कोई लाभ नहीं होगा।

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘इससे दलालों का प्रभाव बढ़ेगा और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा। तबादलों के खिलाफ पहले ही विरोध प्रदर्शन शुरू हो चुके हैं।’’

विजयन ने दावा किया कि वाम मोर्चा सरकार के दौरान तबादले निर्धारित मानकों के अनुसार पारदर्शी तरीके से किए जाते थे और उनमें किसी प्रकार की भ्रष्टाचार संबंधी शिकायत नहीं होती थी।

इसके बाद एलडीएफ के सदस्यों ने सदन से वॉकआउट किया।

भाषा मनीषा रंजन

रंजन


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