एलडीएफ के दूसरे कार्यकाल के दौरान केरल विस का सत्र निर्धारित समय से कम आयोजित हुआ: अध्ययन

एलडीएफ के दूसरे कार्यकाल के दौरान केरल विस का सत्र निर्धारित समय से कम आयोजित हुआ: अध्ययन

एलडीएफ के दूसरे कार्यकाल के दौरान केरल विस का सत्र निर्धारित समय से कम आयोजित हुआ: अध्ययन
Modified Date: June 1, 2026 / 04:13 pm IST
Published Date: June 1, 2026 4:13 pm IST

(टी जी बीजू)

तिरुवनंतपुरम, एक जून (भाषा) केरल की 15वीं विधानसभा की 16 सत्रों के दौरान कुल 204 बैठकें हुईं। इस विधानसभा का कार्यकाल मई 2021 से फरवरी 2026 तक था जिस दौरान लगातार दूसरी बार राज्य में माकपा के नेतृत्व वाली वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार थी। एक नयी मूल्यांकन रिपोर्ट से यह जानकारी सामने आयी।

‘व्यवहार में लोकतंत्र: 15वीं केरल विधानसभा (2021-26) का मूल्यांकन’ नामक रिपोर्ट तिरुवनंतपुरम स्थित गैर सरकारी संगठन ‘बजट एंड लेजिस्लेटिव रिसर्च (बीएलआर)’ के लिए पूर्व मुख्य सचेतक डॉ. एन. जयराज और उनके निजी सचिव डॉ. रेल्फी पॉल द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की गई थी।

इसमें पाया गया कि 14वीं केरल विधानसभा की तुलना में 28 कम सत्र हुए, जो 22 सत्रों में 232 दिनों तक चली थी। यह गिरावट, पिछली विधानसभा द्वारा कोविड-19 काल के दौरान भी अधिक सत्र आयोजित किए जाने के बावजूद आई।

अध्ययन से पता चला कि कुल कार्य घंटे 14वीं विधानसभा में 1,265 घंटे से घटकर 2021-26 के कार्यकाल के दौरान लगभग 1,192 घंटे हो गए, जो लगभग 73 घंटे की कमी है। हालांकि, बैठक का औसत दैनिक समय 5.3 घंटे से बढ़कर लगभग 5.5 घंटे हो गया, जो दर्शाता है कि लंबे समय तक बैठक होने से कम बैठक वाले दिनों की भरपाई आंशिक रूप से हो गई।

रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि 15वीं विधानसभा के मूल कैलेंडर में पांच साल के कार्यकाल में लगभग 300 बैठकें, यानी प्रतिवर्ष लगभग 60 दिन निर्धारित थे। हालांकि, केवल 204 बैठकें ही हुईं, जिससे 96 दिनों की कमी रह गई।

रिपोर्ट के अनुसार, यह अंतराल सदन के कामकाज को पुनर्निर्धारित करने और समय आवंटित करने के संबंध में व्यापार सलाहकार समिति के निर्णयों, विधायी कार्य के सरकारी आकलन के आधार पर सत्रों के समय से पहले समापन और बाहरी राजनीतिक, प्रशासनिक और अप्रत्याशित कारकों के परिणामस्वरूप हुआ।

भाषा प्रशांत मनीषा

मनीषा


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