तिरुवनंतपुरम, तीन सितंबर (भाषा) केरलम राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने कहा कि आंगनवाड़ियों के माध्यम से वितरित किए जाने वाले अमृतम न्यूट्री मिक्स में चीनी मिलाने से बच्चों के स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है।
आयोग ने महिला एवं बाल विकास (डब्ल्यूसीडी) विभाग को निर्देश दिया है कि एकीकृत बाल विकास सेवा (आईसीडीएस) योजना के तहत बच्चों को दिए जाने वाले न्यूट्री मिक्स की तैयारी में चीनी का पूरी तरह इस्तेमाल बंद करने की संभावना पर विचार किया जाए और इसके स्थान पर थोड़ी मात्रा में गुड़ शामिल करने की संभावना तलाश की जाए।
एक बयान के अनुसार, आयोग ने डब्ल्यूसीडी निदेशक को बच्चों को दिए जाने वाले उत्पादों की पोषण संरचना वैज्ञानिक तरीके से निर्धारित करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का भी निर्देश दिया है।
आयोग ने कहा कि डब्ल्यूसीडी निदेशक को केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप बच्चों की उम्र के आधार पर न्यूट्री मिक्स की निर्धारित मात्रा के संबंध में अधीनस्थ अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी करने चाहिए।
आयोग ने यह भी कहा कि उत्पाद के पैकेट पर उसकी पोषण संबंधी जानकारी और बच्चों को दी जाने वाली अनुशंसित मात्रा स्पष्ट रूप से लिखी जानी चाहिए।
विभाग को आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और लाभार्थियों के लिए अमृतम न्यूट्री मिक्स तथा अन्य पोषण संबंधी सामग्री के इस्तेमाल, उन्हें तैयार करने की सही विधि और स्वस्थ आदतों का पालन करने के महत्व के बारे में जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित करने चाहिए।
यह आदेश आयोग के सदस्य पी. शाजेश भास्कर ने पलक्कड़ जिले के पट्टिथारा निवासी के. सहला द्वारा दायर याचिका पर जारी किया।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि आंगनवाड़ियों के माध्यम से वितरित किए जाने वाले अमृतम पाउडर में 20 प्रतिशत चीनी होती है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के दिशा-निर्देशों के विपरीत है।
याचिका में यह भी कहा गया था कि छह महीने से तीन वर्ष तक की उम्र के बच्चों द्वारा इसका सेवन करने से उनमें कम उम्र में ही जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
आयोग ने टिप्पणी की कि अत्यधिक मात्रा में चीनी का सेवन लंबे समय में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का कारण बन सकता है और यह बच्चों के सर्वोत्तम हितों और उनके पोषण के अधिकार के भी विपरीत है।
भाषा गोला देवेंद्र
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