केरल: कुख्यात अपराधी की तलाश में पार्टी समर्थकों के घरों पर छापेमारी को लेकर माकपा शिकायत करेगी

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केरल: कुख्यात अपराधी की तलाश में पार्टी समर्थकों के घरों पर छापेमारी को लेकर माकपा शिकायत करेगी

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  • Publish Date - August 9, 2026 / 04:18 PM IST,
    Updated On - August 9, 2026 / 04:18 PM IST

पतनमथिट्टा, नौ अगस्त (भाषा) केरल के मल्लप्पल्ली में कुख्यात अपराधी अर्जुन अयांकी की तलाश में पार्टी समर्थकों के घरों पर देर रात पुलिस की कथित छापेमारी के मामले में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) मुख्यमंत्री, गृह मंत्री और राज्य मानवाधिकार आयोग से शिकायत करेगी। जिला सचिव राजू अब्राहम ने रविवार को यह जानकारी दी।

अब्राहम ने पत्रकारों को बताया कि शनिवार देर रात करीब आठ पुलिस वाहन मल्लप्पल्ली के कट्टामला इलाके में पहुंचे।

पुलिस ने अयांकी की तलाश में कई घरों पर छापेमारी की और इस दौरान बुजुर्गों समेत घर में मौजूद लोगों को नींद से जगा दिया।

पुलिस ने बाद में अर्जुन अयांकी को कन्नूर से गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस ने दावा किया था कि उन्हें अयांकी के इलाके में मौजूद होने की पुख्ता सूचना मिली थी, जिसपर अब्राहम ने सवाल उठाया कि छापेमारी से पहले पुलिस ने सूचना की पुष्टि क्यों नहीं की।

उन्होंने देर रात घरों में छापेमारी की कार्रवाई के तरीके पर भी आपत्ति जताई।

अब्राहम ने सवाल किया, “अगर अयांकी यहां आया था, तो क्या पुलिस के पास उसकी मोबाइल टावर लोकेशन की जानकारी नहीं होगी, जिससे इसकी पुष्टि की जा सकती थी? क्या यहां सड़कों पर जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हैं? क्या पुलिस ने इस दिशा में कोई जांच की? क्या केरल पुलिस इतनी अक्षम है?”

उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने खास तौर पर माकपा समर्थकों के घरों को निशाना बनाया, जिनमें स्थानीय पार्टी सचिव का आवास भी शामिल था।

माकपा नेता ने यह भी सवाल उठाया कि छापेमारी अभियान के लिए आठ वाहनों को क्यों तैनात किया गया।

उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन, गृह मंत्री रमेश चेन्निथला, केरल मानवाधिकार आयोग और अन्य संबंधित अधिकारियों के समक्ष शिकायतें दर्ज कराई जाएंगी।

अब्राहम ने कहा, “दोषी अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए, क्योंकि यह पूरी तरह गलत है। अर्जुन अयांकी की तलाश के नाम पर पुलिस ने यहां जिस तरह की कार्रवाई की, उसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।”

भाषा जितेंद्र दिलीप

दिलीप