इस्लामाबाद, नौ अगस्त (भाषा) प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और उनके भाई नवाज शरीफ के नेतृत्व वाली पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में महीनों से जारी हिंसक प्रदर्शनों के बाद प्रदर्शनकारियों से निपटने के मामले में नरम रुख अपनाती नजर आ रही है।
पार्टी अब क्षेत्र में सरकार बनाने जा रही है।
प्रधानमंत्री के सलाहकार राणा सनाउल्ला ने शनिवार को कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में प्रदर्शन करने वाले 99 प्रतिशत लोग ‘‘देशभक्त’’ हैं।
उन्होंने कहा कि पार्टी के प्रतिनिधि जल्द ही प्रतिबंधित ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के सदस्यों से मुलाकात करेंगे।
जेएएसी कार्यकर्ताओं का एक समूह है, जो इस क्षेत्र में प्रदर्शनों की अगुवाई कर रहा है।
कुछ दिन पहले तक पार्टी का दावा था कि प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन तहरीक-ए-तालिबान के सदस्य प्रदर्शनकारियों में शामिल हैं।
पार्टी ने सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई को न्यायोचित ठहराने के लिए यह दावा किया था।
सनाउल्ला ने शनिवार को पीओके में ‘‘चुनाव’’ के तीसरे चरण से पहले आयोजित एक रैली को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी से जुड़े 99 प्रतिशत लोग हमारे देशभक्त भाई हैं।’’
भारत का स्पष्ट रूख है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का पूरा हिस्सा उसका अभिन्न व अविभाज्य हिस्सा है।
नयी दिल्ली ने स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान ने इन केंद्र शासित प्रदेशों के कुछ हिस्सों पर ‘‘अवैध और जबरन कब्जा’’ कर रखा है।
सनाउल्ला ने शनिवार को कहा, ‘‘जब दो-तिहाई बहुमत के साथ पीएमएल-एन की सरकार बनेगी, तो वह ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करेगी। उसका पहला काम इस मुद्दे का समाधान करना होगा।’’
अब तक हुए चुनाव के दो चरणों में पीएमएल-एन ने 25 सीट पर जीत हासिल की है और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) की तथाकथित विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है।
विधानसभा में 45 निर्वाचित सीट हैं।
इन चुनावों के दौरान व्यापक हिंसा और बड़े पैमाने पर धांधली के आरोप लगाए गए हैं।
पीएमएल-एन का सीधा मुकाबला पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) से था, जो संघीय सरकार में उसकी गठबंधन सहयोगी है।
तीसरे और अंतिम चरण में सोमवार को चार सीट के लिए मतदान होगा जबकि सात निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिए गए हैं।
पीओके में दो महीने से अधिक समय से विरोध प्रदर्शन जारी हैं।
भाषा जितेंद्र धीरज
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