केरल के चिकित्सकों ने ‘अवैज्ञानिक’ घरेलू प्रसव के खिलाफ सख्त कानून की मांग की

केरल के चिकित्सकों ने ‘अवैज्ञानिक’ घरेलू प्रसव के खिलाफ सख्त कानून की मांग की

केरल के चिकित्सकों ने ‘अवैज्ञानिक’ घरेलू प्रसव के खिलाफ सख्त कानून की मांग की
Modified Date: April 9, 2025 / 04:25 pm IST
Published Date: April 9, 2025 4:25 pm IST

तिरुवनंतपुरम, नौ अप्रैल (भाषा) केरल के चिकित्सकों ने राज्य में घर पर ही बच्चे को जन्म देने की घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की तथा ऐसी ‘‘आपराधिक प्रथाओं’’ के खिलाफ सख्त कानून बनाने की मांग की है।

पांच अप्रैल को मलप्पुरम जिले में अपने किराए के घर में बच्चे को जन्म देते समय अत्यधिक रक्तस्राव के कारण 35 वर्षीय महिला की मृत्यु पर कड़ा विरोध जताते हुए केरल सरकार चिकित्सा अधिकारी संघ (केजीएमओए) ने कहा, ‘‘ऐसी आपराधिक प्रथाओं के खिलाफ कड़ा कानून बनाया जाना चाहिए।’’

संगठन ने यहां एक बयान में कहा, ‘‘यह बेहद चिंताजनक है कि इस युग में भी जब आधुनिक चिकित्सा विज्ञान इतना आगे बढ़ चुका है, लोग अभी ऐसी उपचार पद्धतियों को अपनाने को तैयार हैं जिनका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। संगठन मांग करता है कि इस तरह की आपराधिक प्रथाओं के खिलाफ सख्त कानून बनाया जाए।’’

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बयान में कहा गया है कि हालांकि हर साल होने वाले लगभग 3,00,000 प्रसवों में से अधिकतर अस्पतालों में होते हैं, लेकिन यह चिंताजनक है कि लगभग 500 प्रसव अब भी घर पर होते हैं।

केजीएमओए ने कहा, ‘‘इसका एक बड़ा कारण उपचार के अवैज्ञानिक तरीकों के प्रति आकर्षण है, चाहे ऐसा जानबूझकर हो या अनजाने में।’’

इसने कहा कि गर्भावस्था के दौरान और प्रसव के बाद उचित चिकित्सा सहायता प्राप्त करना तथा समाज में स्वस्थ जीवन जीना प्रत्येक बच्चे का अधिकार है।

भाषा शफीक नरेश

नरेश


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