केरल के आबकारी मंत्री ने राज्य में बार के समय में किए गए बदलाव का बचाव किया
केरल के आबकारी मंत्री ने राज्य में बार के समय में किए गए बदलाव का बचाव किया
तिरुवनंतपुरम/त्रिशूर, 18 फरवरी (भाषा) केरल के आबकारी मंत्री एम बी राजेश ने राज्य भर में बार के समय को बढ़ाने के सरकार के फैसले का बचाव करते हुए बुधवार को कहा कि यह पहले से ही पर्यटन स्थलों पर लागू था और भेदभाव की शिकायतों को दूर करने के लिए इसे सभी जगह पर लागू किया गया था।
राजेश ने कहा कि राज्य सरकार पूरे केरल में बार से लाइसेंस शुल्क के रूप में 35 लाख रुपये वसूलती है, चाहे वे पर्यटन स्थलों पर स्थित हों या अन्य स्थानों पर।
मंत्री ने तिरुवनंतपुरम में पत्रकारों से कहा कि लेकिन, केवल पर्यटन स्थलों पर स्थित बार को ही सुबह 10 बजे से आधी रात तक संचालित करने की अनुमति थी, जिससे भेदभाव की शिकायतें और समय में एकरूपता लाने की मांगें उठीं।
इस फैसले के प्रति विभिन्न चर्चों के विरोध के बारे में राजेश ने कहा, ‘देखते हैं यह मामला कितना आगे बढ़ता है और कौन क्या कहता है।’
पत्रकारों ने जब उनसे कहा कि कथित तौर पर कैथोलिक चर्च ने इसे ‘चुनावों से पहले का समझौता’ बताया है तो राजेश ने कहा कि यह संभव नहीं है कि वे ऐसा कहें।
उन्होंने कहा, ‘हो सकता है कि उन्होंने सरकार के बारे में ऐसा न कहा हो। वे हमारे बारे में ऐसा नहीं कह सकते।’
इससे पहले दिन में राज्य में बार के समय में बदलाव करने के एलडीएफ सरकार के फैसले का मलंकरा ऑर्थोडॉक्स चर्च ने विरोध किया और दावा किया कि यह पूरी पीढ़ी, विशेष रूप से केरल के युवाओं को बर्बाद कर देगा।
मलंकरा ऑर्थोडॉक्स सेरियन चर्च के ‘एसोसिएशन सेक्रेटरी’, अधिवक्ता बिजू ओम्मन ने सरकार के इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि यह निर्णय पूरी पीढ़ी, विशेष रूप से राज्य के युवाओं को बर्बाद कर देगा।
उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘क्या सरकार चाहती है कि युवा बार में सोएं? राज्य के लोग इस बात से चिंतित हैं कि बार को इतने लंबे समय तक खुला रहने देने का क्या परिणाम होगा।’
इस फैसले का समर्थन करते हुए एलडीएफ संयोजक टी पी रामकृष्णन ने कहा कि यह कोई नई बात नहीं है क्योंकि पर्यटन स्थलों पर ये समय पहले से ही लागू हैं।
दूसरी ओर कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी यूडीएफ ने कहा कि आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले यह निर्णय लिए जाने के पीछे कुछ ‘रहस्यमय’ कारण हैं। उसने कहा, ‘राज्य भर में बार के समय में एकरूपता लाने के फैसले की कैबिनेट द्वारा गंभीरता से समीक्षा करने की आवश्यकता है।’
भाषा
शुभम अविनाश
अविनाश

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