केरल: स्थानीय स्वशासी संस्थाओं की योजना निधि में कटौती को लेकर विधानसभा में तीखी बहस
केरल: स्थानीय स्वशासी संस्थाओं की योजना निधि में कटौती को लेकर विधानसभा में तीखी बहस
तिरुवनंतपुरम, एक जुलाई (भाषा) केरल विधानसभा में बुधवार को स्थानीय स्वशासी संस्थाओं के लिए योजना निधि के आवंटन में कटौती के मुद्दे पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। विपक्षी वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) ने मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन पर सदन को ‘गुमराह’ करने का आरोप लगाते हुए सदन से बहिर्गमन किया।
भाकपा विधायक जी. आर. अनिल ने कार्य स्थगन प्रस्ताव पेश करते हुए आरोप लगाया कि योजना निधि में कटौती के कारण स्थानीय निकायों के कामकाज पर गंभीर प्रभाव पड़ा है।
कार्य स्थगन प्रस्ताव का जवाब देते हुए सतीशन ने कहा कि सदन को कई बार बताया जा चुका है कि राज्य की वित्तीय सीमाओं के कारण स्थानीय निकायों के लिए योजना निधि के आवंटन में 1,533.55 करोड़ रुपये की कटौती करनी पड़ी।
उन्होंने कहा कि यह संकट पिछली एलडीएफ सरकार की बजट और योजना संबंधी नीतियों का परिणाम है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, पिछली सरकार ने यह जानते हुए भी कि केवल लगभग 20,000 करोड़ रुपये ही उपलब्ध होंगे, बजट में लगभग 35,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को शामिल कर लिया था।
उन्होंने कहा कि इसके कारण सभी विभागों के योजना आवंटन में अनुपातिक कटौती करना अपरिहार्य हो गया।
विपक्ष पर तंज कसते हुए सतीशन ने कहा कि अनिल की ओर से की जा रही आलोचना दरअसल पिछली एलडीएफ सरकार के बजट पर ही सवाल खड़े करती है।
मुख्यमंत्री ने यह आरोप भी लगाया कि पिछली सरकार ने विधानसभा चुनाव का हवाला देते हुए अपने अंतिम बजट में निर्धारित निधि की तीसरी किस्त जारी नहीं की थी, जो दिसंबर में जारी की जानी थी।
उन्होंने कहा, “आपके बजट और योजना में खामियों के कारण 1,533 करोड़ रुपये की कटौती करना अपरिहार्य हो गया। अब आप उसी फैसले के लिए हमारी आलोचना कर रहे हैं।’
हालांकि, नेता प्रतिपक्ष पिनराई विजयन ने मुख्यमंत्री के तर्कों को खारिज करते हुए उन पर विधानसभा को ‘गुमराह’ करने का आरोप लगाया।
सतीशन के रुख को ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ बताते हुए विजयन ने उनसे अपना पक्ष सही तरीके से रखने का आग्रह किया और इस दावे को भी नकार दिया कि पिछली एलडीएफ सरकार के कार्यकाल में परियोजनाएं पूरी करने में अनावश्यक देरी हुई थी।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के अनुसार जो तीसरी किस्त दिसंबर में जारी की जानी थी, वह वास्तव में मार्च में जारी होनी थी।
उन्होंने कहा कि लेकिन विधानसभा चुनाव से पहले आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद निर्वाचन आयोग से अनुमति नहीं मिलने की वजह से वह राशि जारी नहीं की जा सकी।
मुख्यमंत्री के जवाब के आधार पर अध्यक्ष ने बाद में कार्य स्थगन प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। इसके बाद विरोध स्वरूप विपक्षी सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन कर दिया।
भाषा जोहेब वैभव
वैभव

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