तिरुवनंतपुरम, 28 जनवरी (भाषा) केरल राजभवन ने बुधवार को विधानसभा अध्यक्ष ए.एन. शमशीर के उस बयान को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि राज्यपाल विश्वनाथ अर्लेकर की ओर से उन्हें भेजा गया एक “अत्यंत गोपनीय” पत्र पहले मीडिया को प्राप्त हुआ, फिर उन्हें मिला।
राजभवन ने कहा कि वह अध्यक्ष के इस दावे को स्पष्ट रूप से अस्वीकार करते हुए इसका सख्ती से खंडन करता है।
राजभवन के अनुसार, पत्र की मूल प्रति विधिवत रूप से विधानसभा अध्यक्ष को भेजी गई थी और राज्यपाल कार्यालय ने यह नहीं पाया कि उक्त पत्र किसी भी मीडिया संस्थान में प्रकाशित हुआ है।
एक बयान में राजभवन ने यह भी कहा कि उसे राज्यपाल की ओर से भेजे गए पत्र पर विधानसभा अध्यक्ष की प्रतिक्रिया पर आपत्ति है। बयान में कहा गया है, “नियम और मर्यादा इस प्रकार के पत्र के जवाब में संवाददाता सम्मेलन करने की अनुमति नहीं देते।”
राजभवन ने कहा कि राज्यपाल ने हमेशा विधानसभा के साथ संवाद में संवैधानिक शिष्टाचार, संस्थागत गरिमा और स्थापित परंपराओं का पालन किया है।
बयान में कहा गया है, “तथ्यों की पुष्टि किए बिना इन सिद्धांतों पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाना दुर्भाग्यपूर्ण है और इससे उच्च संवैधानिक पदों की गरिमा को ठेस पहुंचती है।”
राजभवन ने संयम, जिम्मेदारी और संवैधानिक मानदंडों के प्रति सम्मान दिखाने की अपील करते हुए कहा कि इस तरह के संवेदनशील मामलों पर भविष्य में तथ्यों और मर्यादा के आधार पर चर्चा होनी चाहिए, न कि अटकलों के आधार पर।
शमशीर ने मंगलवार को कहा था कि यह “विडंबना” है कि राज्यपाल का एक “अत्यंत गोपनीय” पत्र उन्हें प्राप्त होने से पहले मीडिया को मिल गया। उन्होंने यह भी कहा था कि वह ऐसे पत्र का जवाब नहीं देंगे। अर्लेकर ने अपने पत्र में 20 जनवरी को बजट सत्र की शुरुआत के अवसर पर विधानसभा में अध्यक्ष द्वारा दिए गए भाषण की वीडियो फुटेज मांगी थी।
भाषा जोहेब सुरेश
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