केरल: शबरिमला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश संबंधी मुद्दे पर सियासी बयानबाजी तेज

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केरल: शबरिमला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश संबंधी मुद्दे पर सियासी बयानबाजी तेज

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  • Publish Date - February 15, 2026 / 05:48 PM IST,
    Updated On - February 15, 2026 / 05:48 PM IST

तिरुवनंतपुरम, 15 फरवरी (भाषा) शबरिमला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का मुद्दा एक संक्षिप्त विराम के बाद रविवार को फिर उठा, जिससे केरल में राजनीतिक बहस छिड़ गई।

विपक्ष ने एलडीएफ सरकार से मांग की कि वह मंदिर में युवा महिलाओं के प्रवेश पर अपना रुख स्पष्ट करे।

इस मुद्दे को लेकर सत्तारूढ़ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और विपक्षी दल कांग्रेस के नेताओं के बीच नए सिरे से आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए।

बताया जा रहा है कि उच्चतम न्यायालय सभी आयु वर्ग की महिलाओं को भगवान अयप्पा मंदिर में प्रवेश की अनुमति देने संबंधी 2018 के अपने फैसले से जुड़ीं पुनर्विचार और रिट याचिकाओं पर सोमवार को सुनवाई करने वाला है।

कांग्रेस ने मुख्यमंत्री पिनराई विजयन से शीर्ष अदालत में सरकार का रुख स्पष्ट करने की मांग की, जबकि माकपा ने कहा कि वह यह खुलासा नहीं कर सकती कि सरकार अदालत में क्या दलीलें पेश करेगी।

कोच्चि में पत्रकारों से बातचीत में राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष वी डी सतीशन ने सवाल किया कि केरल सरकार शबरिमला में महिलाओं प्रवेश के मामले में उच्चतम न्यायालय में पहले दाखिल अपने हलफनामे पर कायम रहेगी या उसे वापस लेगी।

उन्होंने आरोप लगाया कि वाम सरकार इस मुद्दे पर “अस्पष्ट रुख” अपना रही है।

सतीशन ने कहा, “यदि सरकार महिलाओं के प्रवेश का समर्थन जारी रखती है, तो उसे अपने हलफनामे पर कायम रहना चाहिए। यदि नहीं, तो उसे हलफनामा वापस लेना चाहिए। स्पष्ट रुख होना चाहिए।”

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का वास्तविक रुख अदालत में उसके रुख से स्पष्ट होगा।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार अदालत से और समय मांगती है, तो इसका मतलब होगा कि उसका रुख अभी भी स्पष्ट नहीं है।

कांग्रेस के संगठन महासचिव के सी वेणुगोपाल ने भी कहा कि राज्य सरकार को शबरिमला मामले में अपना हलफनामा संशोधित करना चाहिए और पार्टी में इस पर पुनर्विचार करने की कोई जरूरत नहीं है।

उन्होंने दावा किया कि पूरा केरल राज्य ऐसा चाहता है।

वेणुगोपाल ने सवाल किया कि सरकार पीछे कैसे हट सकती है।

विपक्ष की ओर से हो रही आलोचना का जवाब देते हुए माकपा के राज्य सचिव एम. वी. गोविंदन ने कहा कि सरकार अदालत के सामने अपना रुख रखेगी और चिंता की कोई बात नहीं है।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की गरिमा और श्रद्धालुओं के हितों की रक्षा होनी चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह बताने से इनकार कर दिया कि सरकार अदालत में क्या कहेगी।

उन्होंने पलक्कड़ में पत्रकारों से कहा, “जब आवश्यक होगा, पार्टी अपना रुख बताएगी। कल सरकार को अपनी दलीलें रखनी हैं और वह रखेगी।”

जब गोविंदन से पूछा गया कि क्या माकपा शबरिमला में महिलाओं के प्रवेश के मुद्दे पर अपना रुख बदलेगी, तो उन्होंने कहा कि कुछ भी अपरिवर्तनीय नहीं है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट जवाब देने से परहेज किया।

साल 2018 में उच्चतम न्यायालय ने मासिक धर्म आयु वर्ग की महिलाओं के शबरिमला मंदिर में प्रवेश पर लगे प्रतिबंध को “असंवैधानिक” करार देते हुए हटा दिया था।

इस फैसले के बाद व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे और यह मामला अब बड़ी पीठ के समक्ष विचाराधीन है।

भाषा जोहेब दिलीप

दिलीप