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नई दिल्ली: CBSE Board Exam 2026 आज से केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की बोर्ड परीक्षाएं शुरू हो रही है। आज कक्षा 10वीं और 12वीं दोनों पेपर शुरू होंगे। इस साल कुल 43,67,870 परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल हो रहे हैं, जिससे स्कूलों और परीक्षा केंद्रों पर खासा उत्साह और हलचल देखने को मिल रही है। इसी बीच एक बड़ी खबर आ रही है। खबर उत्तरप्रदेश के कुशीनगर जिले से आ रही है। खबर परीक्षा से पहले हो रही अनियमितताओं से जुड़ी हुई है। चलिए विस्तार से पूरा मामला बताते हैं।
उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में माध्यमिक शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गया है। बोर्ड परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले प्रश्नपत्रों के वितरण को लेकर भारी अनियमितता सामने आई है। आरोप है कि विभागीय नियमों को दरकिनार कर बोर्ड परीक्षा के प्रश्नपत्र प्राइवेट गाड़ियों से विभिन्न परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाए जा रहे हैं। इस घटना ने प्रश्नपत्रों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासनिक लापरवाही और संभावित गड़बड़ी की आशंकाओं को जन्म दे दिया है।
जानकारी के मुताबिक, बोर्ड परीक्षा के प्रश्नपत्रों को सुरक्षित रूप से विभागीय वाहनों के जरिए निर्धारित केंद्रों तक पहुंचाने का स्पष्ट नियम है। लेकिन कुशीनगर में इसके उलट तस्वीर सामने आई। प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय सूत्रों का दावा है कि कई प्राइवेट वाहन प्रश्नपत्रों के पैकेट लेकर सड़कों पर घूमते देखे गए। बताया जा रहा है कि कुछ स्कूलों के प्रिंसिपल स्वयं प्राइवेट गाड़ियों में प्रश्नपत्र लेकर परीक्षा केंद्रों का चक्कर लगाते रहे। इससे प्रश्नपत्रों की गोपनीयता और सुरक्षा पूरी तरह खतरे में पड़ती नजर आई।
सूत्रों के अनुसार, पडरौना स्थित राजकीय कन्या इंटर कॉलेज से प्रश्नपत्रों का वितरण होना था। नियम के तहत यहां से विभागीय गाड़ियों के माध्यम से प्रश्नपत्रों को सुरक्षित सीलबंद अवस्था में परीक्षा केंद्रों तक भेजा जाना चाहिए था। लेकिन आरोप है कि निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और प्रश्नपत्रों को निजी वाहनों में लादकर भेजा गया। इस दौरान सुरक्षा के मानकों की भी अनदेखी की गई, जिससे प्रश्नपत्र लीक होने या छेड़छाड़ की आशंका बढ़ गई है।
इस पूरे मामले ने जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) कार्यालय की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि डीआईओएस श्रवण गुप्ता के नेतृत्व में माध्यमिक शिक्षा विभाग की व्यवस्थाएं चरमराई हुई हैं और प्रश्नपत्र वितरण जैसे संवेदनशील कार्य में भी नियंत्रण नहीं रह गया है। शिक्षा विभाग के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि परीक्षा जैसे अत्यंत गोपनीय और महत्वपूर्ण कार्य में इस तरह की लापरवाही भविष्य में बड़े घोटाले का कारण बन सकती है। फिलहाल प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है ।