सुरक्षा, एकाधिकार संबंधी चिंताओं के मद्देनजर अदाणी-एमएससी हिस्सेदारी सौदे की समीक्षा करेगा केरल: सतीशन

सुरक्षा, एकाधिकार संबंधी चिंताओं के मद्देनजर अदाणी-एमएससी हिस्सेदारी सौदे की समीक्षा करेगा केरल: सतीशन

सुरक्षा, एकाधिकार संबंधी चिंताओं के मद्देनजर अदाणी-एमएससी हिस्सेदारी सौदे की समीक्षा करेगा केरल: सतीशन
Modified Date: July 1, 2026 / 04:16 pm IST
Published Date: July 1, 2026 4:16 pm IST

तिरुवनंतपुरम, एक जुलाई (भाषा) केरल के मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन ने बुधवार को कहा कि राज्य सरकार विड़िण्गम बंदरगाह का संचालन करने वाली ‘अदाणी विड़िण्गम पोर्ट प्राइवेट लिमिटेड’ (एवीपीपीएल) में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी स्विट्जरलैंड की मेडिटेरेनियन शिपिंग कंपनी (एमएससी) को हस्तांतरित करने के प्रस्ताव की गहन समीक्षा करेगी।

सतीशन ने साथ ही कहा कि कंपनी के स्वामित्व में राज्य सरकार की पूर्व मंजूरी के बिना कोई बदलाव नहीं किया जा सकता।

उन्होंने विधानसभा में विपक्ष के नेता पिनराई विजयन के एक बयान का जवाब देते हुए कहा कि सरकार को प्रस्तावित सौदे के बारे में मीडिया की खबरों से जानकारी मिली और ‘अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन’ (एपीएसईजेड) ने सरकार को इस संबंध में कोई औपचारिक सूचना नहीं दी है।

एपीएसईजेड ने मंगलवार को घोषणा की थी कि दुनिया की सबसे बड़ी नौवहन कंपनियों में शामिल एमएससी करीब 1.4 अरब अमेरिकी डॉलर में एवीपीपीएल की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदेगी।

इससे पहले दिन में प्रश्नकाल के दौरान एक सदस्य द्वारा यह मुद्दा उठाए जाने पर सतीशन ने कहा कि प्रस्तावित हिस्सेदारी हस्तांतरण को लेकर मीडिया में खबरें आई हैं लेकिन कंपनी ने मंजूरी के लिए सरकार से संपर्क नहीं किया है।

सतीशन ने विपक्ष के नेता के बयान पर विस्तृत जवाब देते हुए कहा कि अदाणी पोर्ट्स ने इस मामले में केरल सरकार को कोई जानकारी नहीं दी है।

उन्होंने कहा, ‘‘सरकार को कोई पत्र या सूचना नहीं दी गई है।’’

मुख्यमंत्री ने रियायत समझौते की धारा 5.3 का हवाला देते हुए कहा, ‘‘रियायत प्राप्त कंपनी प्राधिकरण की पूर्व मंजूरी के बिना स्वामित्व में कोई बदलाव नहीं करेगी और न ही इसकी अनुमति देगी। यहां प्राधिकरण का अर्थ केरल सरकार है।’’

उन्होंने कहा कि कंपनी अधिनियम के तहत 25 प्रतिशत से अधिक शेयर के हस्तांतरण को स्वामित्व में बदलाव माना जाता है और राज्य सरकार की मंजूरी के बिना ऐसा नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव अभी सरकार के पास नहीं आया है।

सतीशन ने कहा, ‘‘जब प्रस्ताव हमारे पास आएगा तो हम इसकी समीक्षा करेंगे।’’

उन्होंने कहा कि सरकार कोई फैसला लेने से पहले पांच प्रमुख पहलुओं- राष्ट्रीय सुरक्षा, जनहित, निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा, निवेश और बंदरगाह के दीर्घकालिक विकास -का आकलन करेगी।

सतीशन ने कहा कि विड़िण्गम रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण परिसंपत्ति है इसलिए केंद्रीय पोत परिवहन मंत्रालय और केंद्रीय गृह मंत्रालय की मंजूरी भी आवश्यक होगी।

उन्होंने कहा, ‘‘सबसे महत्वपूर्ण बात यह सुनिश्चित करना है कि वहां साझा उपयोग की सुविधा हो। ऐसी एकाधिकार की स्थिति नहीं बननी चाहिए जिसमें केवल एक कंपनी को विशेष पहुंच मिले।’’

सतीशन ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि सभी नौवहन कंपनियों, पोत संचालकों, निर्यातकों, आयातकों, माल ढुलाई सेवा प्रदाताओं और अन्य हितधारकों को बंदरगाह का इस्तेमाल करने का समान अवसर मिले।

सतीशन ने कहा कि एमएससी केवल वित्तीय निवेशक ही नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी कंटेनर नौवहन कंपनियों में शामिल है और कंटेनर टर्मिनल सुविधाओं की भी एक प्रमुख संचालक है।

उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए हमें इस बात की सावधानीपूर्वक समीक्षा करनी होगी कि कंपनी इस सुविधा का उपयोग किस तरह करना चाहती है।’’

इससे पहले विजयन ने मुख्यमंत्री के इस स्पष्टीकरण का स्वागत किया कि सौदे को कोई मंजूरी नहीं दी गई है, लेकिन उन्होंने सरकार से प्रस्ताव की सावधानीपूर्वक समीक्षा करने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा, ‘‘जब मैंने मीडिया में खबरें देखीं तो मुझे संदेह हुआ कि क्या राज्य सरकार को भी इस बारे में जानकारी है। मुख्यमंत्री के स्पष्टीकरण से वह चिंता दूर हो गई है।’’

विपक्ष के नेता ने कहा कि रियायत समझौते के तहत इस प्रस्ताव की राष्ट्रीय सुरक्षा और व्यापक जनहित के नजरिये से समीक्षा की जानी चाहिए।

उन्होंने पहलगाम हमले और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान केंद्र सरकार द्वारा विड़िण्गम को अत्यंत महत्वपूर्ण अवसंरचना माने जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि सुरक्षा संबंधी पहलुओं की अनदेखी नहीं की जा सकती।

विजयन ने प्रस्तावित सौदे के व्यावसायिक प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई।

एपीएसईजेड ने 2.85 अरब अमेरिकी डॉलर के इस मूल्यांकन को भारत की बंदरगाह अवसंरचना में अब तक का सबसे बड़ा विदेशी निजी निवेश बताया है।

भाषा सिम्मी रंजन

रंजन


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