खरगे का प्रधानमंत्री को पत्र, परिसीमन मामले पर सर्वदलीय बैठक बुलाने का आग्रह दोहराया

खरगे का प्रधानमंत्री को पत्र, परिसीमन मामले पर सर्वदलीय बैठक बुलाने का आग्रह दोहराया

खरगे का प्रधानमंत्री को पत्र, परिसीमन मामले पर सर्वदलीय बैठक बुलाने का आग्रह दोहराया
Modified Date: August 27, 2026 / 04:02 pm IST
Published Date: August 27, 2026 4:02 pm IST

नयी दिल्ली, 27 अगस्त (भाषा) कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर आग्रह किया कि परिसीमन के मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए और किसी भी प्रस्ताव को संसद में पेश करने से पहले सभी राजनीतिक दलों तथा राज्य सरकारों को उस पर विस्तार से अध्ययन करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाए।

खरगे ने पत्र में कहा, ‘‘मैं अपने पहले के अनुरोध को दोहराना चाहता हूं कि परिसीमन से संबंधित आपके मन में जो भी प्रस्ताव हैं, उन पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाएं और सभी राजनीतिक दलों तथा राज्य सरकारों को ऐसे प्रस्तावों का अध्ययन करने के लिए पर्याप्त समय दें।’’

कांग्रेस अध्यक्ष ने इस बात का उल्लेख किया कि उन्होंने इससे पहले 16 जुलाई, 2026 को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सरकार के परिसीमन संबंधी प्रस्तावों पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने का अनुरोध किया था।

खरगे ने कहा कि वह अब इस अनुरोध को दोहरा रहे हैं क्योंकि केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने पिछली रात एक टेलीविजन साक्षात्कार में सार्वजनिक रूप से कहा है कि संसद का विशेष सत्र बुलाया जा सकता है।

उन्होंने कहा, ‘‘शायद यही कारण है कि मानसून सत्र का अभी तक सत्रावसान नहीं किया गया है।’’

खरगे ने कहा कि कांग्रेस का इस मामले पर रुख बिल्कुल स्पष्ट है।

उन्होंने परिसीमन को लेकर तीन मांगें रखते हुए कहा कि लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या अगले 25 वर्षों तक बरकरार रखी जाए, लोकसभा में राज्यों के लिए मौजूदा सीटों का आवंटन अगले 25 वर्षों तक कायम रखा जाए और 2029 के लोकसभा चुनाव से महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण लागू किया जाए।

खरगे ने कहा कि यह ऐसा मुद्दा है जिसका देश के लिए व्यापक असर हो सकता है और प्रधानमंत्री को 16 और 17 अप्रैल, 2026 की तरह इसे दोबारा ‘‘बुलडोज करने’’ की कोशिश नहीं करनी चाहिए।

इस साल 17 अप्रैल को लोकसभा में महिला आरक्षण एवं परिसीमन से जुड़ा 131वां संविधान संशोधन विधेयक आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल पाने के कारण पारित नहीं हो सका था। इस विधेयक के पक्ष में 298 वोट और विपक्ष में 230 वोट पड़े थे।

भाषा हक हक शोभना

शोभना


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