कोलकाता की सात बड़ी दुर्गा पूजा समितियां सरकारी सहायता राशि के लिए आवेदन नहीं करेंगी

कोलकाता की सात बड़ी दुर्गा पूजा समितियां सरकारी सहायता राशि के लिए आवेदन नहीं करेंगी

कोलकाता की सात बड़ी दुर्गा पूजा समितियां सरकारी सहायता राशि के लिए आवेदन नहीं करेंगी
Modified Date: September 8, 2026 / 05:10 pm IST
Published Date: September 8, 2026 5:10 pm IST

कोलकाता, आठ सितंबर (भाषा) कोलकाता की सात लोकप्रिय दुर्गा पूजा समितियों ने पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पूजा आयोजनों के लिए घोषित एक लाख रुपये की सहायता राशि लेने से इनकार करने का फैसला किया है। यह निर्णय बड़े बजट वाले आयोजकों से सहायता राशि न लेने की मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की अपील के बाद लिया गया है।

इन सात समितियों में से एक ‘राजडांगा नबा उदय संघ’ ने इसके बजाय मुख्यमंत्री राहत कोष में एक लाख रुपये दान करने का फैसला किया है। समिति की अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रदेश प्रवक्ता केया घोष ने यह जानकारी दी।

छह अन्य दुर्गा पूजा समितियों में ‘संतोषपुर लेक पल्ली’, ‘ताला प्रत्यय’, ‘चोरबागान सार्वजनिन’, ‘नाकतला उदयन संघ’, ‘संतोष मित्रा स्क्वायर’ और ‘फूलबागान सार्वजनिन’ शामिल हैं।

आयोजकों ने सोशल मीडिया के जरिए सरकारी अनुदान के लिए आवेदन नहीं करने के अपने फैसले की घोषणा की।

सोमवार को दुर्गा पूजा आयोजकों के साथ बैठक के दौरान शुभेंदु अधिकारी ने कहा था कि छोटी पूजा समितियों को आवेदन करने के बाद सरकार की ओर से एक-एक लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी।

हालांकि उन्होंने बड़े बजट वाली दुर्गा पूजा समितियों से स्वेच्छा से सहायता राशि नहीं लेने की अपील की।

भाजपा विधायक और पूजा आयोजक सजल घोष ने सोशल मीडिया पर कहा कि जिस ‘संतोष मित्रा स्क्वायर’ पूजा समिति से वह जुड़े हैं, उसने पहले भी सरकारी सहायता राशि स्वीकार नहीं की थी और इस साल भी ऐसा ही करने का फैसला किया है।

सहायता राशि लेने की इच्छुक पूजा समितियों को संबंधित थानों के माध्यम से आवेदन करना होगा। इसके बाद आवेदनों की जांच की जाएगी और निर्धारित सरकारी प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई के लिए पुलिस प्रशासन के जरिए उन्हें भेजा जाएगा।

‘संतोषपुर लेक पल्ली’ पूजा समिति ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘घोषणा के लिए माननीय मुख्यमंत्री का बहुत-बहुत धन्यवाद। हम विनम्रतापूर्वक कहना चाहते हैं कि हम यह सहायता राशि स्वीकार नहीं कर रहे हैं।’’

भाषा आशीष नरेश

नरेश


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