केपीएससी ‘घोटाला’ मामला: आईएएस अधिकारी गंगवार के कर्नाटक, उप्र परिसरों पर ईडी की छापेमारी
केपीएससी ‘घोटाला’ मामला: आईएएस अधिकारी गंगवार के कर्नाटक, उप्र परिसरों पर ईडी की छापेमारी
बेंगलुरु/नयी दिल्ली, 23 अगस्त (भाषा) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) द्वारा आयोजित एक परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़े धनशोधन मामले की जांच के तहत रविवार को आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार के बेंगलुरु और उत्तर प्रदेश के बरेली स्थित परिसरों पर छापेमारी की। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
गंगवार भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के 2016 बैच के अधिकारी हैं और वर्तमान में कर्नाटक के उद्योग एवं वाणिज्य विभाग में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) निदेशक के पद पर तैनात हैं। वह इससे पहले केपीएससी में परीक्षा नियंत्रक के पद पर कार्यरत थे और इस साल मार्च में उन्हें इस पद से हटाया गया था।
अधिकारियों ने बताया कि गंगवार के बेंगलुरु के जयमहल इलाके और उत्तर प्रदेश के बरेली स्थित परिसरों में धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत छापे मारे गए। हालांकि, यह तत्काल पता नहीं चल सका कि केंद्रीय एजेंसी को अधिकारी इन परिसरों में मिले या नहीं।
शनिवार को कुछ घंटों के लिए गंगवार के “लापता” होने की खबर सामने आने के बाद विवाद उत्पन्न हो गया था। बाद में कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खरगे ने इन खबरों का खंडन करते हुए स्पष्ट किया कि गंगवार अपने पिता की तबीयत से जुड़ी पारिवारिक आपात स्थिति के कारण उत्तर प्रदेश स्थित अपने पैतृक स्थान गए हैं।
खरगे ने कहा कि गंगवार के लापता होने और उनकी गैरमौजूदगी को केपीएससी में ईडी की छापेमारी से जोड़ने वाली खबरें गलत हैं। खरगे ने कहा कि उन्होंने अधिकारी से व्यक्तिगत रूप से बात की है और वह जल्द लौटेंगे।
उन्होंने कहा, “परिस्थितियों के कारण ऐसा निष्कर्ष निकला होगा, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।”
खरगे ने शनिवार को पत्रकारों से कहा था, “परिस्थितियां भले ही केपीएससी से उनका संबंध होने का संकेत देती हों, लेकिन उन्होंने (गंगवार) स्पष्ट रूप से कहा है कि एक सरकारी कर्मचारी के तौर पर वह किसी भी एजेंसी की जांच के लिए तैयार हैं। फिलहाल उनके खिलाफ कोई आरोप नहीं है और न ही किसी ने उनके खिलाफ जांच की मांग करते हुए आवेदन दिया है। यह बात पूरी तरह स्पष्ट होनी चाहिए।”
ईडी ने 18 अगस्त को इस मामले में पहली बार तलाशी अभियान चलाया था। इस दौरान बेंगलुरु स्थित केपीएससी के मुख्यालय के अलावा आयोग के पूर्व अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस. साहूकार, सदस्य शांता होसमणि और कुछ अन्य लोगों के परिसरों की भी तलाशी ली गई थी।
यह जांच पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती परीक्षा में कथित घोटाले से जुड़े धनशोधन जांच के तहत की जा रही है।
ईडी का आरोप है कि कुछ बिचौलियों ने शिकायतकर्ता समेत अभ्यर्थियों को फोन किया और चयन के लिए प्रति अभ्यर्थी 70 लाख से 80 लाख रुपये की रिश्वत मांगी।
अधिकारियों ने कहा था कि इसके अलावा, एजेंसी परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने, ओएमआर उत्तर पुस्तिकाओं में हेरफेर करने और केपीएससी अधिकारियों के रिश्तेदारों को अंतिम चयन में मदद पहुंचाने के आरोपों की भी जांच कर रही है।
पिछले सप्ताह कर्नाटक मंत्रिमंडल ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत से साहूकार को निलंबित करने की सिफारिश करने का फैसला किया था।
यह फैसला साहूकार के पहले के निलंबन को कर्नाटक उच्च न्यायालय द्वारा रद्द करके उन्हें बहाल किए जाने के बाद लिया गया। हालांकि, अदालत ने निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करने पर उनके खिलाफ नए सिरे से कार्रवाई की संभावना खुली रखी थी।
भाषा अमित नेत्रपाल
नेत्रपाल

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