कुकी संगठनों ने समुदाय के विधायकों को मणिपुर में सरकार गठन से दूर रहने को कहा

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कुकी संगठनों ने समुदाय के विधायकों को मणिपुर में सरकार गठन से दूर रहने को कहा

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  • Publish Date - February 5, 2026 / 01:22 PM IST,
    Updated On - February 5, 2026 / 01:22 PM IST

इंफाल, पांच फरवरी (भाषा) मणिपुर के कई कुकी संगठनों ने अपने समुदाय के विधायकों को राज्य में सरकार गठन की प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लेने की चेतावनी दी है। इसके साथ ही चुराचांदपुर में ‘पूर्ण बंद’ और कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया गया है।

भारतीय जनता पार्टी के विधायक युमनाम खेमचंद सिंह ने बुधवार को मणिपुर के 13वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। उन्होंने यह पदभार भाजपा नेता एन. बीरेन सिंह के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के लगभग एक वर्ष बाद संभाला। राज्य में मेइती और कुकी समुदायों के बीच महीनों तक चली जातीय हिंसा के बाद राष्ट्रपति शासन लगाया गया था।

कुकी समुदाय से ताल्लुक रखने वाली भाजपा विधायक नेमचा किपगेन और नगा पीपुल्स फ्रंट विधायक एल. दिखो ने मणिपुर के उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है।

इस घटनाक्रम के बाद चुराचांदपुर जिले के आदिवासी संगठन ‘जॉइंट फोरम ऑफ सेवन’ (जेएफ-7) ने शुक्रवार को सुबह छह बजे से शाम छह बजे तक कुकी-जो बहुल इलाकों में ‘पूर्ण बंद’ का आह्वान किया है। संगठन ने अलग कुकी प्रशासन की मांग दोहराते हुए समुदाय के सभी सदस्यों से लोकतांत्रिक तरीके से विरोध में शामिल होने की अपील की है।

कुकी जो काउंसिल ने कहा कि यदि समुदाय का कोई विधायक संगठन के सामूहिक निर्णय की अनदेखी करता है तो वह ऐसा अपनी व्यक्तिगत हैसियत में करेगा और ऐसे ‘एकतरफा फैसलों’ से उत्पन्न परिणामों के लिए संगठन जिम्मेदार नहीं होगा।

कुछ कुकी उग्रवादी संगठनों ने भी समुदाय के विधायकों को सरकार गठन में भाग लेने के खिलाफ कड़ी चेतावनी जारी की है।

बुधवार रात कुकी बहुल कांगपोकपी जिले के लेइमाखोंग के पास प्रदर्शनकारियों ने टायर जलाए और सड़क पर बांस के डंडे रखकर नेमचा किपगेन के उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने का विरोध किया।

उल्लेखनीय है कि मणिपुर में तीन मई 2023 से जातीय हिंसा जारी है, जिसकी शुरुआत पहाड़ी जिलों में निकाली गई एक आदिवासी एकजुटता रैली के बाद हुई थी। यह रैली बहुसंख्यक मेइती समुदाय की अनुसूचित जनजाति (एसटी) दर्जे की मांग के विरोध में निकाली गई थी।

हिंसा में अब तक कुकी और मेइती समुदायों के सदस्यों तथा सुरक्षा कर्मियों सहित कम से कम 260 लोगों की मौत हो चुकी है, तथा हजारों लोग बेघर हो गए हैं।

भाषा मनीषा अमित

अमित