Parliament Budget Session 2026 || Image- Sansad TV News
Parliament Budget Session 2026: नई दिल्ली: संसद का बजट सत्र जारी है और अलग-अलग मुद्दों को लेकर पक्ष और विपक्ष के बीच तकरार देखने को मिल रही है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कल नफरती और साम्प्रदायिक बयान के लिए भाजपा और मोदी सरकार को आड़े हाथ लिया था तो वही आज उनकी भिड़ंत केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से हो गई। दोनों ही नेताओं ने एक-दूसरे को संसद में बहस के नियम बताये।
VIDEO | Budget Session: “Proceedings of Lok Sabha cannot be discussed in Rajya Sabha, my esteemed colleague should know this,” says Union Minister JP Nadda in Rajya Sabha on LoP Mallikarjun Kharge raising issue of not letting Rahul Gandhi speak in Lok Sabha.
(Source: Third… pic.twitter.com/4iDIsiWr9R
— Press Trust of India (@PTI_News) February 5, 2026
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि संसद का मतलब लोकसभा और राज्यसभा दोनों हैं। लोकसभा में विपक्ष के नेता देशहित के मुद्दे पर बोलना चाहते थे, लेकिन उन्हें बोलने नहीं दिया गया। ऐसे सदन कैसे चलाया जा सकता है? इस पर केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि लोकसभा की कार्यवाही पर राज्यसभा में चर्चा नहीं की जा सकती है।
बजट सत्र के दौरान राज्यसभा में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि लोकसभा की कार्यवाही पर राज्यसभा में चर्चा नहीं की जा सकती, मेरे सम्मानित सहयोगी को यह पता होना चाहिए। अगर इनको इच्छा है तो अपने पार्टी के सदस्यों को बोलें कि लोकसभा में चर्चा करें। राज्यसभा में अच्छे तरीके से चर्चा चल रही है. इसे चलने दें। ऐसा मेरा निवेदन है।
Parliament Budget Session 2026: लोकसभा में पिछले कुछ दिनों से जारी गतिरोध गुरुवार की सुबह भी बरकरार रहा। सदन की कार्यवाही शुरू होने के एक मिनट के भीतर ही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बुधवार को सदन में कई विपक्षी सदस्यों के सत्तापक्ष के वेल की तरफ पहुंचकर विरोध दर्ज कराने की घटना को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि यह घटना के सदन की मर्यादा के प्रतिकूल है। सदन की कार्यवाही 11 बजे शुरू होते ही शोर-शराबा शुरू हो गया।
लोकसभा स्पीकर बिरला ने कहा कि सदन में बुधवार को जो घटना हुई, जिस तरह से विपक्ष के सदस्य सत्तापक्ष की तरफ पहुंचे। यह सदन की मर्यादा के अनुकूल नहीं है. सदन की मर्यादा बनाए रखने की जिम्मेदारी हम सबकी है। अगर मर्यादा खत्म कर देंगे तो सदन की कार्यवाही चलाना अध्यक्ष के लिए उचित नहीं होता।
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