तीस हजारी अदालत परिसर के वकीलों ने नये यातायात चालान नियमों के खिलाफ हड़ताल की

तीस हजारी अदालत परिसर के वकीलों ने नये यातायात चालान नियमों के खिलाफ हड़ताल की

तीस हजारी अदालत परिसर के वकीलों ने नये यातायात चालान नियमों के खिलाफ हड़ताल की
Modified Date: September 24, 2026 / 07:11 pm IST
Published Date: September 24, 2026 7:11 pm IST

नयी दिल्ली, 24 सितंबर (भाषा) दिल्ली बार एसोसिएशन के तत्वावधान में तीस हजारी अदालत परिसर के वकीलों ने यातायात चालान प्रणाली में संशोधनों के विरोध में बृहस्पतिवार को हड़ताल की और पूरे दिन अदालती कार्यवाही से दूर रहे।

इस दौरान सैकड़ों वकील अदालत परिसर के बाहर एकत्र हुए और संशोधनों, विशेष रूप से अदालत का रुख करने से पहले चालान राशि का 50 प्रतिशत जमा करने की अनिवार्यता को लेकर दिल्ली सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

हालांकि, दिल्ली की सभी जिला अदालत बार एसोसिएशनों की समन्वय समिति ने बृहस्पतिवार को अपनी प्रस्तावित हड़ताल और दिल्ली के उपराज्यपाल के आवास तक के विरोध मार्च को वापस ले लिया था।

यह निर्णय समिति के एक प्रतिनिधिमंडल को दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, कानून मंत्री कपिल मिश्रा और परिवहन मंत्री पंकज कुमार सिंह के साथ चर्चा के लिए बुलाए जाने के बाद लिया गया।

बैठक के बाद सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी में नयी चालान प्रणाली में बदलाव करने वाली परिवहन विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के कार्यान्वयन पर रोक लगा दी है।

परिवहन मंत्री सिंह ने कहा कि केंद्रीय मोटर वाहन नियम (सीएमवीआर), 1989 में किए गए बदलावों के संबंध में वकीलों द्वारा उठाए गए मुद्दों की जांच करने के लिए परिवहन विभाग से कहा गया है।

हालांकि, दिल्ली बार एसोसिएशन ने एक हड़ताल का आह्वान किया, जिससे अदालत का पूरे दिन का कामकाज प्रभावित हुआ। वकीलों ने अपना काम नहीं किया जबकि फोटोकॉपी की दुकानें, किताबों की दुकानें और कैंटीन सहित अन्य दुकानें व सुविधाएं भी बंद रहीं।

दिल्ली बार एसोसिएशन के अध्यक्ष डी. के. शर्मा ने कहा कि सरकार द्वारा मोटर वाहन अधिनियम में किए गए संशोधन मनमाने और दिल्ली की आम जनता के खिलाफ हैं।

उन्होंने कहा, ‘सरकार ने संशोधन किए हैं और अब नए नियमों के तहत किसी व्यक्ति को अदालत में चालान को चुनौती देने से पहले चालान राशि का 50 प्रतिशत जमा करना होगा। नए नियम लोगों के हित के खिलाफ हैं क्योंकि नयी डिजिटल प्रणाली उनके लिए चालान को चुनौती देने को मुश्किल बनाती है और उनके पास इसे भरने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता है।’

संशोधित व्यवस्था के तहत जिस व्यक्ति का चालान काटा गया है उसे या तो इसे स्वीकार कर भुगतान करना होगा या राज्य सरकार द्वारा निर्दिष्ट प्राधिकारी के समक्ष निर्धारित पोर्टल के माध्यम से इसे चुनौती देनी होगी। चुनौती संबंधी अर्जी 45 दिनों के भीतर दायर करनी होगी।

वकीलों ने उस प्रावधान पर कड़ी आपत्ति जताई है जिसके अंतर्गत यदि निर्दिष्ट प्राधिकारी द्वारा चुनौती को खारिज कर दिया जाता है तो संबंधित व्यक्ति चालान राशि का 50 प्रतिशत जमा करने के बाद ही सक्षम अदालत का रुख कर सकता है।

भाषा प्रचेता नरेश

नरेश


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