तिरुवनंतपुरम, 10 मई (भाषा) भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के राज्य सचिव विनॉय विश्वम ने रविवार को कहा कि केरल की निवर्तमान एलडीएफ सरकार आशा कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शन को ठीक से संभालने में विफल रही।
एलडीएफ में शामिल भाकपा हाल में संपन्न विधानसभा चुनावों में मिली हार के कारणों की समीक्षा कर रही है। केरल की 140 सदस्यीय विधानसभा के लिये हाल में हुए चुनाव में एलडीएफ महज 35 सीट पर सिमट गई है।
केरल आशा स्वास्थ्य कार्यकर्ता संघ (केएएचडब्ल्यूए) ने पिछले साल 265 दिनों का विरोध प्रदर्शन किया था। आशा कार्यकर्ता मानदेय को बढ़ाकर 21,000 रुपये करने और सेवानिवृत्ति के बाद पांच लाख रुपये के लाभ देने की मांग की थी, जिसे एलडीएफ सरकार ने स्वीकार नहीं किया था।
विश्वम ने कहा, ‘‘वामपंथी सरकार को आशा कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शन जैसे मामलों से निपटने में अलग दृष्टिकोण अपनाना चाहिए था। उसे दक्षिणपंथी सरकार की तरह व्यवहार नहीं करना चाहिए। एक वामपंथी सरकार को श्रमिकों के विरोध प्रदर्शनों का अनादर नहीं करना चाहिए और न ही उन्हें अपमानित करना चाहिए। लेकिन ऐसा ही हुआ।’’
उन्होंने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं को स्वाभाविक रूप से वामपंथी आंदोलन के करीब होना चाहिए था, लेकिन वे मोर्चे से दूर हो गईं।
विश्वम ने कहा कि चुनावी हार एक चेतावनी है कि वामपंथी संगठनों को जनता को प्राथमिकता देनी चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि भाकपा में नेतृत्व परिवर्तन की कोई मांग नहीं है।
विश्वम ने कहा कि विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का फैसला मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) करेगी जबकि उपनेता के लिए भाकपा दावा करेगी।
भाषा धीरज प्रशांत
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