जम्मू कश्मीर के पूर्व मंत्री मुस्तफा कमाल के निधन पर राजनीतिक दलों के नेताओं ने शोक व्यक्त किया

जम्मू कश्मीर के पूर्व मंत्री मुस्तफा कमाल के निधन पर राजनीतिक दलों के नेताओं ने शोक व्यक्त किया

जम्मू कश्मीर के पूर्व मंत्री मुस्तफा कमाल के निधन पर राजनीतिक दलों के नेताओं ने शोक व्यक्त किया
Modified Date: July 15, 2026 / 07:20 pm IST
Published Date: July 15, 2026 7:20 pm IST

श्रीनगर, 15 जुलाई (भाषा) राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर विभिन्न दलों के कई नेताओं ने बुधवार को नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और पूर्व मंत्री शेख मुस्तफा कमाल के परिवार से मुलाकात कर शोक संवेदनाएं व्यक्त कीं। कमाल का लंबी बीमारी के बाद मंगलवार को निधन हो गया।

नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के छोटे भाई और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के चाचा शेख मुस्तफा कमाल का मंगलवार शाम यहां एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। बाद में शहर के सोनवार इलाके में स्थित कब्रिस्तान में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

बुधवार सुबह अब्दुल्ला परिवार के सदस्य यहां एम. ए. रोड के पास स्थित कमाल के आवास पहुंचे। इसके बाद कई अन्य नेताओं ने भी उनके आवास पर पहुंचकर परिवार के प्रति संवेदना प्रकट की।

विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने वैचारिक मतभेदों से परे जाकर शोक संवेदनाएं व्यक्त कीं।

शोक व्यक्त करने वालों में भाजपा नेता और जम्मू के बाहू विधानसभा क्षेत्र से विधायक विक्रम रंधावा, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) विधायक आगा मुंतजिर, अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेता रफी मीर और दिलावर मीर, जम्मू कश्मीर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सैफुद्दीन सोज तथा पीपुल्स डेमोक्रेटिक फ्रंट (पीडीएफ) के अध्यक्ष हकीम यासीन शामिल थे।

नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेताओं (जिनमें मंत्री, सांसद और विधायक भी शामिल थे) ने भी कमाल के परिजनों से मुलाकात की।

इस बीच कश्मीर के प्रमुख मुफ्ती, मुफ्ती नासिर-उल-इस्लाम ने भी कमाल के आवास पर पहुंचकर शोक संवेदनाएं व्यक्त कीं।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अपने चाचा के आवास के बाहर पत्रकारों से बातचीत में कहा कि यह परिवार और पार्टी के लिए बेहद कठिन समय है।

उन्होंने कहा, ‘मेरे पिता के छोटे भाई होने के अलावा कमाल की अपनी एक अलग पहचान थी। वह एक कुशल चिकित्सक थे, जिन्होंने जीवनभर गरीब मरीजों के इलाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जम्मू कश्मीर के स्वास्थ्य मंत्री रहने के दौरान भी उन्होंने तंगमर्ग स्थित अपना निशुल्क क्लीनिक बंद नहीं किया और हर सप्ताह वहां जाकर क्षेत्र के गरीब लोगों का उपचार करते रहे।’

अब्दुल्ला ने दिवंगत नेता के राजनीतिक जीवन को याद करते हुए कहा कि कमाल पहली बार 1986 में विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) बने और उसके बाद विधानसभा सदस्य चुने गए।

भाषा

शुभम वैभव

वैभव


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