नयी दिल्ली, दो मार्च (भाषा) अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, दिल्ली के विशेषज्ञों ने सोमवार को कहा कि लाउडस्पीकर, हेडफोन और अन्य व्यक्तिगत ऑडियो उपकरणों के जरिए तेज संगीत और ध्वनि के लंबे तथा अत्यधिक संपर्क के कारण समय से पहले और अपूरणीय श्रवण हानि हो सकती है।
विश्व श्रवण दिवस की पूर्व संध्या पर एम्स-दिल्ली में ईएनटी (कान,नाक, गला) विभाग के प्रोफेसर डॉ. कपिल सिक्का ने कहा कि तेज आवाज के लंबे समय तक संपर्क में रहने से सुनने की क्षमता में कमी धीरे-धीरे विकसित होती है, इसलिए कई लोग शुरुआती चरण में इसे जान नहीं पाते। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसा नुकसान अपूरणीय है, लेकिन इसे रोका जा सकता है।
ईएनटी विभाग के प्रमुख डॉ. राकेश कुमार ने कहा कि श्रवण हानि से बचने के लिए व्यक्तिगत ऑडियो उपकरणों का उपयोग अधिकतम सीमा के 60 प्रतिशत से कम ध्वनि स्तर पर किया जाना चाहिए और लगभग 60 मिनट का विराम लेना चाहिए।
डॉ. कुमार ने कहा, “शोर का स्तर जितना अधिक होगा, श्रवण हानि से बचने के लिए संपर्क की अवधि उतनी ही कम होनी चाहिए। इससे संचयी श्रवण हानि के बोझ को रोका जा सकेगा।’’
ईएनटी की सहायक प्रोफेसर डॉ. पूनम सागर ने कहा कि शोर-जनित श्रवण हानि, मनोरंजन संबंधी तेज ध्वनि वाली गतिविधियां और व्यक्तिगत ऑडियो उपकरणों के अत्यधिक उपयोग के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है, ताकि इसके बढ़ते चलन को कम किया जा सके।
विशेष रूप से युवाओं से अपील करते हुए विशेषज्ञों ने शोर-जनित श्रवण हानि के प्रति सतर्क रहने की आवश्यकता पर बल दिया।
इस वर्ष विश्व श्रवण दिवस की थीम ‘‘समुदाय से कक्षा तक – सभी बच्चों के लिए श्रवण देखभाल’’ है।
भाषा सुभाष शफीक
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