तृणमूल में विभाजन पर फैसला लेने से पहले दोनों गुटों का पक्ष सुनेंगे लोकसभा अध्यक्ष: सूत्र

तृणमूल में विभाजन पर फैसला लेने से पहले दोनों गुटों का पक्ष सुनेंगे लोकसभा अध्यक्ष: सूत्र

तृणमूल में विभाजन पर फैसला लेने से पहले दोनों गुटों का पक्ष सुनेंगे लोकसभा अध्यक्ष: सूत्र
Modified Date: June 16, 2026 / 11:35 am IST
Published Date: June 16, 2026 11:35 am IST

नयी दिल्ली, 16 जून (भाषा) लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से अलग हुए सांसदों के समूह को मान्यता देने के मुद्दे पर फैसला करने से पहले उसका और ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट, दोनों का पक्ष सुनेंगे। सूत्रों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

सूत्रों के अनुसार, लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ई-मेल भेजकर इस मामले में उसका पक्ष भी मांगा है।

इससे पहले संसद से जुड़े सूत्रों ने बताया था कि लोकसभा अध्यक्ष, अलग हुए सांसदों की, अपेक्षाकृत कम चर्चित राजनीतिक दल ‘नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ (एनसीपीआई) में विलय के बाद अलग समूह के रूप में मान्यता देने की मांग पर कानूनी राय ले सकते हैं।

सूत्रों ने कहा कि इस मांग पर कोई भी निर्णय संसद के मानसून सत्र से पहले लिया जाएगा, जो आमतौर पर जुलाई के तीसरे सप्ताह में शुरू होता है।

उन्होंने बताया कि अलग हुए गुट को मान्यता दी जाए या नहीं, इस पर निर्णय केंद्रीय विधि मंत्रालय की लिखित राय के आधार पर लिया जाएगा। मंत्रालय किसी वरिष्ठ विधि अधिकारी से परामर्श के बाद अपनी राय देगा।

सूत्रों के अनुसार, कानूनी राय इसलिए ली जाएगी ताकि लोकसभा अध्यक्ष का फैसला, यदि अदालत में चुनौती दी जाती है, तो न्यायिक समीक्षा की कसौटी पर खरा उतर सके।

लोकसभा के पूर्व महासचिव और संविधान विशेषज्ञ पी.डी.टी. आचारी ने संविधान की दसवीं अनुसूची के पैरा-4 का हवाला देते हुए कहा कि केवल कोई राजनीतिक दल ही दूसरे राजनीतिक दल में विलय कर सकता है, सांसद या विधायक नहीं।

आचारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘यदि किसी राजनीतिक दल का नेतृत्व दूसरे दल में विलय का निर्णय करता है, तो उसके सांसदों और विधायकों को उस विलय से सहमत होना पड़ता है। लेकिन केवल सांसद या विधायक अपने स्तर पर किसी अन्य राजनीतिक दल में विलय नहीं कर सकते। यही संवैधानिक प्रावधान है।’’

निर्वाचन आयोग के एक पूर्व अधिकारी, जो राजनीतिक दलों से जुड़े मामलों को देखते थे, ने तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों द्वारा एनसीपीआई में विलय की मौजूदा योजना को ‘‘नवाचार’’ करार देते हुए कहा कि इसका उल्लेख न तो दल-बदल विरोधी कानून में है और न ही जनप्रतिनिधित्व अधिनियम में।

रविवार को तृणमूल कांग्रेस में संकट और गहरा गया, जब अलग हुए सांसदों ने एनसीपीआई में विलय की घोषणा की और लोकसभा में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग को लेकर बिरला से मुलाकात की।

बैठक के बाद बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि अध्यक्ष को सौंपे गए ज्ञापन पर पार्टी के 20 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘तृणमूल कांग्रेस के दो-तिहाई सांसदों ने अलग बैठने की व्यवस्था की मांग करते हुए लोकसभा अध्यक्ष को पत्र दिया है। हम नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी में विलय करेंगे और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का समर्थन करेंगे।’’

एनसीपीआई ने जनवरी 2023 में खुद को राजनीतिक दल के रूप में पंजीकृत कराया था। निर्वाचन आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार, इसके पते में पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के सांकराइल स्थित एक भवन का जिक्र है और राष्ट्रीय राजनीति में इसकी मौजूदगी सीमित रही है।

भाषा मनीषा शोभना

शोभना


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