जन विश्वास विधेयक को मिली संसद की मंजूरी

Ads

जन विश्वास विधेयक को मिली संसद की मंजूरी

  •  
  • Publish Date - April 2, 2026 / 06:29 PM IST,
    Updated On - April 2, 2026 / 06:29 PM IST

नयी दिल्ली, दो अप्रैल (भाषा) देश के कारोबारी माहौल को और बेहतर बनाने के लिए छोटे-मोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने और उन्हें तर्कसंगत बनाने के वास्ते 79 केंद्रीय कानूनों के 784 प्रावधानों में संशोधन का प्रस्ताव करने वाले जन विश्वास विधेयक को बृहस्पतिवार को संसद की मंजूरी मिल गई।

राज्यसभा में विधेयक पर हुई चर्चा का वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल द्वारा जवाब देने के बाद ‘जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक 2026’ को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। लोकसभा में यह विधेयक एक दिन पहले पारित हुआ था।

गोयल ने कहा कि जन विश्वास विधेयक का उद्देश्य भरोसे की एक संस्कृति बनाना है और ‘‘विश्वास की संस्कृति’’ भय के आधार पर नहीं, बल्कि विश्वास के आधार पर बनेगी। उन्होंने कहा कि इस प्रस्तावित कानून को इसी सोच के साथ लाया जा रहा है कि विश्वास के साथ विकसित भारत बनाया जाए।

उन्होंने कहा कि प्रस्तावित कानून में सबसे बड़ा यह प्रावधान किया गया है कि यह ‘‘आपको सुधरने का मौका देता है।’’

प्रस्तावित कानून में देश के कारोबारी माहौल को और बेहतर बनाने के लिए छोटे-मोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने और उन्हें तर्कसंगत बनाने के वास्ते 79 केंद्रीय कानूनों के 784 प्रावधानों में संशोधन किया गया है।

गोयल के जवाब के बाद, उच्च सदन ने विधेयक को ध्वनिमत से मंजूरी प्रदान कर दी।

उन्होंने कहा कि कुछ साल पहले देश में करीब 500 स्टार्टअप थे और आज इनकी संख्या तीन लाख से अधिक हो चुकी है। इन स्टार्टअप के संचालक युवाओं से छोटी-मोटी गलतियां हो सकती हैं लेकिन हमें उन्हें इनके लिए सजा देने के बजाय उन्हें आगे बढ़ने का मौका देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि देश की जनता का विश्वास प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर और प्रधानमंत्री मोदी का भरोसा 140 करोड़ देशवासियों पर है और यही इस कानून का आधार है।

मंत्री ने चर्चा का जवाब देते हुए कहा, ‘‘इस कानून में कई ऐसे प्रावधान हैं, जिनमें छोटी-मोटी गलती होने पर पहले चेतावनी दी जाएगी। दूसरी बार, गलती की तो दंड लगेगा और फिर यदि कुछ और गंभीर गलती करते हैं तो तीसरी बार दंड बढ़ जाएगा और अदालती कार्यवाही का सामना करना पड़ेगा।’’

मंत्री ने कहा कि इसे ‘‘चरणबद्ध कार्रवाई’’ कहा जाता है और इससे व्यक्ति को सुधरने का मौका मिलेगा।

उन्होंने कहा, ‘‘प्रस्तावित कानून का उद्देश्य विश्वास की एक संस्कृति बनाना है, ‘कल्चर ऑफ ट्रस्ट’ जो भय के आधार पर नहीं, बल्कि कर्तव्य तथा विश्वास के आधार पर हो। इस (प्रस्तावित) कानून को इसी सोच के साथ लाया गया है।’’

गोयल ने कहा कि यह प्रस्तावित कानून दर्शाता है कि इस कर्तव्य भावना के साथ प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत बनाने के लिए ‘‘हम सब तत्पर हैं।’’

नकली दवाओं से संबंधित प्रावधानों को हल्का करने को लेकर जताई गई आशंका को खारिज करते हुए मंत्री ने कहा कि इन दवाओं के भंडारण, बिक्री, आयात या निर्माण के लिए सजा में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

गोयल ने कहा, ‘‘एक संशोधन ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट में लाया गया है। अगर कोई व्यक्ति गलत दवाई बेचता है, रखता है, आयात करता है, वितरण करता है या नकली दवाई रखता या बेचता है तो प्रावधान में कोई बदलाव नहीं किया गया है। उस पर जुर्माना या दंड पहले जैसा ही रखा गया है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हमने सिर्फ इतना किया कि किसी के पास आयुष, होम्योपैथिक दवा मिल जाए, तो जिसने बनाते वक्त उस पर अपना नाम नहीं लिखा, उस पर कार्रवाई हो। छोटे-मोटे दुकानदारों पर कार्रवाई करने से क्या फायदा होगा?’’

गोयल ने कहा, ‘‘हमने केवल प्रक्रियात्मक खामियों से संबंधित प्रावधानों को सरल बनाया है।’’ उन्होंने कहा कि इन बदलावों के लिए गहन विचार-विमर्श किया गया था।

उन्होंने कहा कि सरकार का यह प्रयास है कि जानबूझ कर की गई गलती, या किसी दूसरे को कोई नुकसान पहुंचाने वाली गलती को छोड़कर छोटे-मोटे अपराध में दंड से निजात दिलाया जाए।

मंत्री ने कहा कि 1,000 से अधिक छोटी-मोटी गलतियों पर अब लोगों को अदालत नहीं जाना पड़ेगा और उन्हें शर्मिंदगी नहीं झेलनी होगी, या तकलीफ नहीं होगी।

उन्होंने कहा कि प्रस्तावित कानून के जरिये करीब 1,000 प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से हटाने और उनका सरलीकरण कर आम लोगों और छोटे उद्यमों को राहत देने का काम किया जा रहा है।

विधेयक में 57 प्रावधानों में कारावास और 158 प्रावधानों में जुर्माने को हटाने का प्रस्ताव है। साथ ही, 17 प्रावधानों में कारावास की अवधि कम करने और 113 प्रावधानों में कारावास और जुर्माने को दंड में परिवर्तित करने का प्रस्ताव किया गया है।

इसमें जीवनयापन को सुगम बनाने के लिए नयी दिल्ली नगरपालिका परिषद अधिनियम, 1994 और मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत 67 संशोधनों का भी प्रस्ताव है।

इसका उद्देश्य मोटर वाहन अधिनियम के तहत 20 संशोधन करना है, ताकि अधिनियम के तहत कुछ अनुपालनों में छूट प्रदान की जा सके और कानूनी अस्पष्टताओं को दूर किया जा सके।

इन संशोधनों में किसी विशेष क्षेत्राधिकार के बजाय पूरे राज्य में वाहन पंजीकरण की अनुमति देना, ड्राइविंग लाइसेंस को समाप्ति तिथि से नहीं बल्कि नवीनीकरण की तिथि से प्रभावी होने की अनुमति देना, और लाइसेंस की समाप्ति के बाद 30 दिनों की छूट अवधि प्रदान करना शामिल है, जिस दौरान लाइसेंस प्रभावी बना रहेगा।

विधेयक पर हुई चर्चा में कांग्रेस के शक्तिसिंह गोहिल, भाजपा के लहर सिंह सरोया, सुरेंद्र सिंह नागर, रामभाई मोकारिया, माया नारोलिया, द्रमुक सदस्य पी विल्सन, आम आदमी पार्टी के अशोक कुमार मित्तल, वाईएसआर कांग्रेस के गोल्ला बाबूराव, बीजू जनता दल के निरंजन बिशी, तेदेपा के मस्तान राव यादव बीधा और समाजवादी पार्टी के रामजीलाल सुमन ने हिस्सा लिया।

इस विधेयक में भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934; बीमा अधिनियम, और पेंशन निधि विनियामक एवं विकास प्राधिकरण अधिनियम में भी संशोधन प्रस्तावित हैं।

इसके अतिरिक्त, कोयला खान भविष्य निधि एवं विविध प्रावधान अधिनियम; पेटेंट अधिनियम; विधिक माप विज्ञान अधिनियम; छावनी अधिनियम, 2006; औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940; खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006; फार्मेसी अधिनियम, 1948; दिल्ली पुलिस अधिनियम; विद्युत अधिनियम; और रेलवे अधिनियम में भी परिवर्तन प्रस्तावित किए गए हैं।

सरकार ने छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने और व्यापार एवं जीवन में सुगमता बढ़ाने के प्रावधान वाले इस विधेयक को 27 मार्च को लोकसभा में पेश किया था।

वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने पिछले वर्ष 18 मार्च को जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक, 2025 को लोकसभा में पेश किया था, जिसे प्रवर समिति को भेजा गया था।

भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या की अध्यक्षता वाली प्रवर समिति की सिफारिशों को शामिल कर यह विधेयक सदन में लाया गया।

भाषा

मनीषा अविनाश

अविनाश