न्यायालय में बीडीपीएल की याचिका खारिज होते ही सबसे लंबे समय से चल रहे कॉरपोरेट विवाद का पटाक्षेप
न्यायालय में बीडीपीएल की याचिका खारिज होते ही सबसे लंबे समय से चल रहे कॉरपोरेट विवाद का पटाक्षेप
नयी दिल्ली, आठ सितंबर (भाषा)उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को राष्ट्रीय कंपनी विधि अपील अधिकरण (एनसीएलएटी) के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए शेयर के लेन-देन से जुड़े विवाद में भगवती डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड (बीडीपीएल) की अपील खारिज कर दी।
न्यायालय के इस निर्णय को पीयरलेस जनरल फाइनेंस एंड इन्वेस्टमेंट कंपनी लिमिटेड के लिए एक बड़ी जीत माना जा रहा है।
बीडीपीएल की याचिका खारिज होने से भारत के सबसे लंबे समय से चल रहे कॉरपोरेट विवादों में से एक का पटाक्षेप हो गया है। यह विवाद गत तीन दशकों से भी अधिक समय से चल रहा था।
न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने बीडीपीएल की याचिका खारिज करते हुए एनसीएलएटी द्वारा 16 अप्रैल के दिये गए आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने अधिवक्ता अरुणाभा देब और आशिका डागा के सहयोग से पीयरलेस का पक्ष रखा जबकि बीडीपीएल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल सुब्रमण्यम ने अधिवक्ता फराज अनीस के सहयोग से अदालत में दलीलें दीं।
यह विवाद 1991 में शुरू हुई कार्यवाही से पैदा हुआ था और इसका संबंध 1987-88 में पीयरलेस द्वारा लिए गए कॉरपोरेट फैसलों और शेयर लेन-देन से संबंधित था।
इस विवाद के केंद्र में कंपनी के अंश धारकों और निदेशक मंडल की मंजूरी से पीयरलेस द्वारा प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिए 30,000 इक्विटी शेयर जारी करना और मौजूदा अंश धारकों की ओर से 15,626 शेयरों का हस्तांतरण था।
बाद में इन लेन-देनों को इस आरोप के साथ चुनौती दी गई कि इनका उद्देश्य पीयरलेस के स्वामित्व में बदलाव करना और धन का गलत इस्तेमाल या दूसरे मदों में व्यय करना था।
शुरुआती कानूनी कार्यवाही कंपनी अधिनियम -1956 की धारा 397 और 398 के तहत शुरू की गई। जब मूल याचिकाकर्ताओं ने कार्यवाही वापस लेने की मांग की, तो बाद में बीडीपीएल को याचिकाकर्ता के तौर पर मुकदमेबाज़ी जारी रखने की अनुमति दे दी गई।
इसके बाद की कानूनी लड़ाई कलकत्ता उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय से होते हुए अंतत: एनसीएलटी तक पहुंची।
राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (एनसीएलटी) ने 18 जुलाई 2022 के अपने आदेश में शेयरों की लेनदेन की तारीख के तीन दशक से भी अधिक समय बाद कंपनी की याचिका को मंजूरी दे दी। पीयरलेस ने एनसीएलएटी में उक्त फैसले को चुनौती दी।
एनसीएलएटी ने 16 अप्रैल 2026 को पीयरलेस की अपील को स्वीकार करते हुए एनसीएलटी के फैसले को रद्द कर दिया।
कॉरपोरेट के पुराने रिकॉर्ड और उस समय के साक्ष्यों पर विचार करने के बाद,एनसीएलएटी ने वित्तीय गड़बड़ी के आरोपों को खारिज कर दिया और संबंधित कारपोरेट फैसलों और शेयरों के लेन-देन की वैधता को बहाल रखा।
इसके बाद, बीडीपीएल ने एनसीएलएटी के फैसले को शीर्ष अदालत में चुनौती दी।
पीयरलेस जनरल फाइनेंस एंड इन्वेस्टमेंट कंपनी लिमिटेड के प्रबंधन निदेशक जयंत रॉय ने फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘‘तीन दशकों से अधिक समय के बाद, यह फैसला पीयरलेस के इतिहास के एक लंबे अध्याय का समापन करता है। हम आभारी हैं कि कंपनी के उन फैसलों की वैधता को आखिरकार सही ठहराया गया है, जो नेक नीयत से और संस्थान के हित में लिए गए थे।’’
भाषा धीरज माधव
माधव

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