मप्र: जहरीली शराब पीने से 11 लोगों की मौत, तीन आबकारी अधिकारी और दो पुलिसकर्मी निलंबित
मप्र: जहरीली शराब पीने से 11 लोगों की मौत, तीन आबकारी अधिकारी और दो पुलिसकर्मी निलंबित
सागर, छह सितंबर (भाषा) मध्यप्रदेश के सागर जिले की बंडा तहसील में जहरीली शराब पीने से अब तक 11 लोगों की मौत हुई है जबकि 54 बीमार लोगों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज जारी है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी। मामले की शुरुआती जांच में उत्तर प्रदेश के ललितपुर से शराब की तस्करी किए जाने की बात सामने आई है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने घटना के बाद कड़ा रुख अपनाते हुए आबकारी विभाग के तीन अधिकारियों को निलंबित कर दिया जबकि एक अधिकारी को हटाकर ग्वालियर मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है।
इसके अलावा बंडा थाना प्रभारी और गूगरा चौकी प्रभारी को भी तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
कांग्रेस ने मामले की न्यायिक जांच की मांग की है।
सागर रेंज के पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) शशींद्र चौहान ने प्रभावित इलाकों का दौरा करने के बाद ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, “जहरीली शराब पीने से जिले के दो गांवों में अब तक 11 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है।”
उन्होंने बताया कि पांच लोग अभी बीमार हैं, जबकि प्रभावित क्षेत्रों में जांच के दौरान 49 अन्य लोगों में धुंधला दिखाई देने और चक्कर आने जैसे लक्षण मिले हैं।
अधिकारी ने बताया कि सभी प्रभावित लोगों को बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है।
चौहान ने बताया कि पीड़ितों के परिजनों की शिकायत के आधार पर तीन अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की गई हैं।
इससे पहले सागर की जिलाधिकारी प्रतिभा पाल ने बंडा में संवाददाताओं को बताया था कि मामला रविवार तड़के करीब चार बजे उनके संज्ञान में आया।
उन्होंने बताया कि मृतकों के शवों का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। जिलाधिकारी ने बताया कि शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि उत्तर प्रदेश के ललितपुर से जहरीली शराब लाई गई थी और एहतियात के तौर पर क्षेत्र में शराब की सात दुकानों को बंद करा दिया गया है।
उन्होंने बताया, “ललितपुर का एक गिरोह इस तरह की गतिविधियों में शामिल हो सकता है। चूंकि यह क्षेत्र उत्तर प्रदेश की सीमा से लगा हुआ है, इसलिए शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है। मामले की जांच की जा रही है।”
सागर के पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया ने बताया कि सूचना मिलते ही जांच शुरू कर दी गई और अब तक सामने आए संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
उन्होंने बताया, “जांच में अभी तक सामने आया है कि जहरीली शराब का स्रोत उत्तर प्रदेश का ललितपुर हो सकता है। पहले भी इस तरह के मामलों में ललितपुर के गिरोहों की संलिप्तता सामने आई है। हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ कर घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।”
अधिकारी ने बताया कि अगर जांच में स्थानीय स्तर पर शराब तस्करों को संरक्षण देने की बात सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
राज्य के आबकारी आयुक्त ने सागर पहुंचकर मामले की जानकारी ली।
उन्होंने बताया कि शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि यह घटना नकली शराब के कारण हुई और पुलिस यह पता लगा रही है कि शराब कहां बनाई गई थी। अधिकारी ने बताया कि नकली शराब की पैकिंग स्थानीय ब्रांड की तरह दिखाई दे रही थी औक लाइसेंसी शराब विक्रेता के एजेंट ने इसे बेच दिया तथा लोगों को यह असली शराब लगी।
मध्यप्रदेश के उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने मंदसौर में ‘पीटीआई-वीडियो’ से बातचीत में 11 लोगों की मौत की पुष्टि की और बताया कि कुछ लोगों का इलाज अस्पतालों में जारी है।
दिल्ली दौरे पर गए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने घटना को बेहद दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण बताया तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया।
मुख्यमंत्री यादव के निर्देश पर सागर की सहायक आबकारी आयुक्त कीर्ति दुबे, सहायक जिला आबकारी अधिकारी दिलीप खंडाते और बंडा वृत्त की आबकारी उपनिरीक्षक प्रोशनी उरेती को निलंबित कर दिया गया।
इसके अलावा उपायुक्त एवं संभागीय उड़नदस्ता प्रभारी नीरजा श्रीवास्तव को सागर से हटाकर ग्वालियर मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया।
आधिकारिक बयान के अनुसार, बंडा थाना प्रभारी राजेंद्र सिंह कुशवाहा और गूगरा चौकी प्रभारी पूरन सिंह लड़िया को भी निलंबित किया गया है।
सागर जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर बंडा क्षेत्र में हुई इस घटना को लेकर कांग्रेस ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है।
कांग्रेस की मध्यप्रदेश इकाई के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने ग्वालियर में संवाददाताओं से कहा कि पूरे प्रदेश में “शराब माफिया बेखौफ होकर लोगों की जान ले रहे हैं” और उन्होंने मामले की न्यायिक जांच की मांग की।
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि जहरीली और अवैध शराब के कारण 11 लोगों की मौत हुई है तथा कई लोग अस्पतालों में जिंदगी व मौत से जूझ रहे हैं।
उन्होंने कहा, “यह केवल हादसा नहीं, बल्कि सरकार की नाक के नीचे चल रहे अवैध शराब कारोबार और प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर मामला है।”
सिंघार ने सवाल उठाया कि मध्यप्रदेश में अवैध शराब का कारोबार कब रुकेगा और यह किसके संरक्षण में हो रहा है।
भाषा सं ब्रजेन्द्र जितेंद्र
जितेंद्र

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