किसी व्यक्ति को दोबारा गिरफ्तार करने के लिए मजिस्ट्रेट की मंजूरी लेना अनिवार्य: न्यायालय
किसी व्यक्ति को दोबारा गिरफ्तार करने के लिए मजिस्ट्रेट की मंजूरी लेना अनिवार्य: न्यायालय
नयी दिल्ली, 21 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि यदि किसी व्यक्ति को किसी मामले में गिरफ्तारी के आधार नहीं बताए जाने या 24 घंटे से अधिक समय तक हिरासत में रखे जाने के कारण अदालत द्वारा रिहा किया जाता है, तो जांच एजेंसी को उसे दोबारा गिरफ्तार करने के लिए मजिस्ट्रेट के पास जाना होगा।
शीर्ष अदालत ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 22(1) और 22(2) में कहा गया है कि किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तारी के आधार बताए बिना गिरफ्तार नहीं किया जा सकता और गिरफ्तार/हिरासत में लिए गए व्यक्ति को 24 घंटे के अंदर निकटतम मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाना चाहिए।
अदालत ने कहा कि इन अनुच्छेद से छेड़छाड़ नहीं की जा सकती है।
उच्चतम न्यायालय ने कहा कि जिस बात को रेखांकित करने का प्रयास किया गया है वह यह है कि एक बार जब अनुच्छेद 22(1) का उल्लंघन होता है, तो आरोपी को दोबारा गिरफ्तार करने की शक्ति उसी प्राधिकरण की इच्छा पर नहीं छोड़ी जानी चाहिए जिसने संविधान के उक्त प्रावधान का उल्लंघन किया था।
अदालत ने कहा कि इसके लिए न्यायिक मंजूरी आवश्यक है।
न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुयान और न्यायमूर्ति ए. एस. चंदुरकर की पीठ ने कहा कि संविधान या उसके किसी प्रावधान की व्याख्या बिना किसी संदर्भ के नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि संविधान की व्याख्या को अनिश्चितता या ‘अगर-मगर’ पर नहीं छोड़ा जा सकता।
पीठ ने कहा, “संविधान कुछ बुनियादी सिद्धांतों पर आधारित है, जो वैधानिक सीमा से बहुत ऊपर हैं। इसलिए, संविधान या किसी संवैधानिक प्रावधान के उल्लंघन को स्वीकार नहीं किया जा सकता। इससे सख्ती से निपटा जाना चाहिए। ”
पीठ ने कहा कि अगर आरोपी की रिहाई के बाद उसे गिरफ्तारी के कारण बता दिए गए और उसे दोबारा गिरफ्तार करना जरूरी है, तो मजिस्ट्रेट जांच एजेंसी को दोबारा गिरफ्तारी की अनुमति दे सकता है।
अदालत ने यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) मामले के एक आरोपी जसकरण जीत सिंह देओल की याचिका खारिज करने के पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के 29 मई का एक आदेश रद्द कर दिया।
देओल ने अपनी गिरफ्तारी को रद्द करने तथा मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ याचिका दायर की थी।
मजिस्ट्रेट आदेश में कहा गया था कि जांच एजेंसी को अपीलकर्ता के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट मांगने, उसे दोबारा गिरफ्तार करने या उसकी हिरासत मांगने से प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता।
मजिस्ट्रेट ने इससे पहले यह पता चलने के बाद देओल को हिरासत से रिहा कर दिया था कि अनुच्छेद 22(1) का पालन नहीं किया गया था, लेकिन पंजाब पुलिस को कानून की उचित प्रक्रिया का पालन करके उसे गिरफ्तार करने की अनुमति दे दी थी।
भाषा जोहेब अविनाश
अविनाश

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