थाने से आरोपी को जबरन छुड़ाने के प्रयास मामले में मजीठिया को मिली अग्रिम जमानत
थाने से आरोपी को जबरन छुड़ाने के प्रयास मामले में मजीठिया को मिली अग्रिम जमानत
चंडीगढ़, 15 जून (भाषा) पंजाब के अमृतसर की एक अदालत ने सोमवार को शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को अग्रिम जमानत दे दी।
मजीठिया और अन्य लोगों के खिलाफ एक थाने में घुसकर हिरासत में लिए गए व्यक्ति को जबरन छुड़ाने का प्रयास करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया था।
मजीठिया ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज होने के बाद अदालत का रुख किया था। उन पर लोक सेवकों को उनके कर्तव्य का पालन करने से रोकने, सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ आपराधिक बल का प्रयोग करने, सामान या रिकॉर्ड छीनने, सरकारी रिकॉर्ड को नुकसान पहुँचाने, आपराधिक धमकी देने, गैरकानूनी रूप से इकट्ठा होने और दंगा करने सहित कई आरोप लगाए गए हैं।
मामले में शस्त्र अधिनियम के प्रावधान भी लगाए गए हैं।
शिरोमणि अकाली दल के प्रवक्ता अर्शदीप सिंह क्लेर ने कहा कि मजीठिया को इस मामले में अग्रिम जमानत मिल गई है।
आरोप है कि मजीठिया 31 मई को 50-60 लोगों के साथ अमृतसर के एक थाने में घुस गए थे और मजीठिया ने पुलिस हिरासत में मौजूद अकाली दल के कार्यकर्ता जोबनप्रीत सिंह को जबरन छुड़ाने का प्रयास किया था।
प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने अमृतसर स्थित मजीठिया के आवासों पर छापेमारी की थी। हालांकि, मजीठिया का अब तक पता नहीं चल सका है।
शिरोमणि अकाली दल ने दावा किया था कि जोबनप्रीत सिंह हाल ही में हुए स्थानीय निकाय चुनावों में पार्टी का पोलिंग एजेंट था। पार्टी का आरोप था कि उसे पुलिस हवालात के बजाय थाना प्रभारी के आवास पर रखा गया था। अकाली दल ने इस मामले को ‘‘मनगढ़ंत’’ बताते हुए इसे ‘‘राजनीतिक प्रतिशोध’’ से प्रेरित करार दिया था।
तीन जून को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने जोबनप्रीत सिंह को रिहा करने का निर्देश दिया था। अदालत ने यह आदेश उस याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया, जिसमें कहा गया था कि उसे गिरफ्तारी का आधार बताए बिना हिरासत में रखा गया था।
जोबनप्रीत सिंह के पिता मुखवंत सिंह ने याचिका में कहा था कि उनके बेटे की गिरफ्तारी अवैध और असंवैधानिक थी।
याचिका में कहा गया था कि 31 मई को जोबनप्रीत सिंह को गिरफ्तारी के लिखित आधार उपलब्ध कराए बिना हिरासत में लिया गया, जो संविधान के अनुच्छेद 22(1) तथा उच्चतम न्यायालय के विभिन्न फैसलों में निर्धारित कानून का उल्लंघन है।
भाषा
राखी दिलीप
दिलीप

Facebook


