नयी दिल्ली, आठ सितंबर (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने 2018 में मालवीय नगर में एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या की कोशिश के मामले में दो आरोपियों को बरी कर दिया है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हरगुरविंदर सिंह जग्गी ने अनुज गुल्लिया उर्फ अन्नू और आश मोहम्मद उर्फ आशू को हत्या के प्रयास और हथियारों के इस्तेमाल से संबंधित धाराओं के तहत लगे आरोपों से बरी कर दिया।
अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष दोनों आरोपियों की पहचान हमलावरों के रूप में साबित करने में विफल रहा।
अदालत ने सात सितंबर को पारित आदेश में कहा, ‘‘आपराधिक न्यायशास्त्र का मूल सिद्धांत है कि आरोपी के खिलाफ मामला संदेह से परे साबित करने का दायित्व अभियोजन पक्ष का होता है। यह दायित्व कभी स्थानांतरित नहीं होता। इस मामले में प्रत्यक्ष पहचान का पूरी तरह अभाव है, क्योंकि गवाह अपने बयान से मुकर गए।’’
अदालत ने कहा कि घायल पीड़ित इकबाल कुरैशी और उसके भाई इमरान कुरैशी समेत सभी पांच महत्वपूर्ण गवाह अदालत में आरोपियों की पहचान करने में नाकाम रहे।
अदालत ने कहा, ‘‘मुकदमे के दौरान प्रत्यक्ष साक्ष्यों का पूरा ढांचा ढह गया।’’
यह घटना 13 मई 2018 को हुई थी, जब मालवीय नगर मुख्य बाजार के पास कुरैशी पर हमला किया गया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार दो लोग मोटरसाइकिल से आए और हेलमेट पहन कर पीछे बैठे व्यक्ति ने कुरैशी पर कई गोलियां चलाईं।
अदालत ने हालांकि कहा कि आरोपियों को गोलीबारी से जोड़ने वाला कोई विश्वसनीय प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं है, क्योंकि गवाहों ने लगातार कहा था कि हमलावरों ने हेलमेट पहन रखा था।
न्यायाधीश ने कहा, ‘‘अभियोजन पक्ष के मामले को उसके अपने वैज्ञानिक साक्ष्यों से भारी झटका लगा है।’’
अदालत ने कहा कि फॉरेंसिक जांच से यह साबित हुआ कि घटनास्थल से बरामद खाली कारतूस और पीड़ित के शरीर से निकाली गई गोलियां उस देशी पिस्तौल से नहीं चलाई गई थीं, जिसे कथित तौर पर गुल्लिया से बरामद किया गया था।
अदालत ने कहा, ‘‘ये वैज्ञानिक निष्कर्ष निर्णायक रूप से साबित करते हैं कि आरोपी अनुज गुल्लिया से बरामद देशी पिस्तौल का इस्तेमाल गोलीबारी में नहीं हुआ था।’’
अदालत ने गुल्लिया से पिस्तौल की बरामदगी को भी संदिग्ध बताया। अदालत ने कहा कि गिरफ्तारी कथित रूप से आबादी वाले इलाके में हुई थी, लेकिन बरामदगी के समय कोई स्वतंत्र गवाह शामिल नहीं किया गया।
अदालत ने यह भी कहा कि जब्ती दस्तावेज पर गुल्लिया के हस्ताक्षर नहीं थे और पुलिस गवाह इस कमी का संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे सके।
आश मोहम्मद के संबंध में अदालत ने कहा कि उसे गोलीबारी से जोड़ने वाला ‘‘बिल्कुल कोई साक्ष्य नहीं’’ है। उसे पुलिस हिरासत में कथित रूप से दिए गए बयान के आधार पर मामले में शामिल किया गया था, लेकिन अदालत ने कहा कि किसी बरामदगी के अभाव में ऐसे बयान का कोई कानूनी महत्व नहीं है।
अदालत ने दोनों आरोपियों को सभी आरोपों से बरी करते हुए कानून के प्रावधानों के तहत 10-10 हजार रुपये के नए बांड भरने का निर्देश दिया।
भाषा रवि कांत रवि कांत अविनाश
अविनाश