ममता ने पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक के खिलाफ न्यायालय का रुख किया
ममता ने पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक के खिलाफ न्यायालय का रुख किया
नयी दिल्ली, 19 सितंबर (भाषा) पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के दो प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच विवाद के कारण पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर निर्वाचन आयोग द्वारा लगाई गई रोक के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख किया है।
निर्वाचन आयोग ने शुक्रवार को दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए। इससे एक दिन पहले आयोग ने अंतरिम आदेश जारी कर विवाद का ठोस समाधान होने तक दोनों गुटों को ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और उसके आरक्षित चुनाव चिह्न जोड़ा फूल एवं घास का इस्तेमाल करने से रोक दिया था।
निर्वाचन आयोग ने बृहस्पतिवार रात जारी अपने अंतरिम आदेश में बनर्जी और अरूप रॉय के नेतृत्व वाले दोनों गुटों के नेताओं की दलीलें सुनने के बाद कहा था कि इस मामले में चुनाव चिह्न (आरक्षण एवं आवंटन) आदेश, 1968 के प्रावधानों के तहत आयोग द्वारा ठोस निर्णय लिए जाने की आवश्यकता है।
उच्चतम न्यायालय में दायर अपनी याचिका में बनर्जी ने निर्वाचन आयोग और पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी को प्रतिवादी बनाया है।
बनर्जी ने 18 सितंबर को तृणमूल कांग्रेस के नाम और ‘जोड़ाफूल एवं घास’ चुनाव चिह्न पर रोक के निर्वाचन आयोग के फैसले की आलोचना की थी। उन्होंने पार्टी की पहचान छिनने की तुलना मां से उसके बच्चे के बिछड़ने के दर्द से की थी और इसे देश के लोकतांत्रिक इतिहास का ‘‘काला दिन’’ बताया था।
बनर्जी ने कहा था कि वह अंतरिम व्यवस्था को अंतिम समाधान के रूप में स्वीकार नहीं करेंगी और पार्टी की मूल पहचान तथा ‘जोड़ा फूल और घास’ चुनाव चिह्न को वापस पाने के लिए राजनीतिक, लोकतांत्रिक और कानूनी तरीके से आखिरी दम तक लड़ेंगी।
निर्वाचन आयोग द्वारा बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को छह अक्टूबर को होने वाले नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव के लिए ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न आवंटित किए जाने के कुछ समय बाद उनका यह बयान आया था।
अरूप रॉय के नेतृत्व वाले प्रतिद्वंद्वी गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया।
पूर्वी मेदिनीपुर जिले के नंदीग्राम और मुर्शिदाबाद जिले के रेजीनगर विधानसभा सीट पर उपचुनाव छह अक्टूबर को होने हैं और मतों की गिनती नौ अक्टूबर को होगी।
पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम सीट पर उपचुनाव इसलिए कराने पड़ रहे हैं क्योंकि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों जगहों से जीते थे और उन्होंने नंदीग्राम सीट छोड़ने का फैसला किया, जबकि आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) नेता हुमायूं कबीर नौदा और रेजीनगर दोनों जगहों से जीते थे और उन्होंने रेजीनगर की सीट छोड़ने का फैसला किया था।
निर्वाचन आयोग का यह आदेश मई में विधानसभा चुनाव में हार के कारण तृणमूल कांग्रेस विधायक दल में हुए विद्रोह के बाद आया है जो बाद में संसद तक पहुंच गया।
जून में 58 बागी विधायकों ने ममता गुट के उम्मीदवार शोभनदेब चट्टोपाध्याय के बजाय निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी को पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष चुना और विधानसभा अध्यक्ष से उन्हें मान्यता भी मिल गई। यह पार्टी के 28 साल के इतिहास में पहला विभाजन था।
इसके पांच दिन बाद यह बगावत संसद तक पहुंच गई। वरिष्ठ नेता काकोली घोष दस्तीदार की अगुवाई में 20 लोकसभा सदस्यों ने ‘नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया’ (एनसीपीआई) का दामन थामा और ‘‘अलग गुट के तौर पर’’ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को समर्थन दिया। इससे पार्टी के संसदीय खेमे में दरार और गहरी हो गई।
भाषा सुरभि धीरज
धीरज

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