ममता बुधवार को भवानीपुर से दाखिल करेंगी नामांकन, बहुलवादी होने का संदेश देंगी
ममता बुधवार को भवानीपुर से दाखिल करेंगी नामांकन, बहुलवादी होने का संदेश देंगी
कोलकाता, सात अप्रैल (भाषा) पश्चिम बंगाल में इस महीने उत्तरार्ध में होने वाले विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया के तहत मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बुधवार को भवानीपुर सीट से बतौर तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार नामांकन दाखिल करेंगी।
ममता बनर्जी की योजना इस दौरान खुद को बहुलवादी और समावेशी होने का राजनीतिक संदेश देने की है। यह इलाका संकरी गलियों और पुरानी हवेलियों वाला है, जहां दशकों से गुजराती व्यापारी, बंगाली परिवार, पंजाबी परिवार और मुस्लिम निवासी साथ-साथ रहते आए हैं।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी ने पिछले सप्ताह इस सीट से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में अपना नामांकन दाखिल किया था। इस दौरान उन्होंने राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन और ‘परिवर्तन’ के लिए भगवा आह्वान किया गया था।
शुभेंदु अधिकारी के शक्ति प्रदर्शन के जवाब में ममता बनर्जी ने बुधवार को वैचारिक प्रतिवाद के रूप में भवानीपुर को ‘मिनी इंडिया’ के रूप में प्रस्तुत करने करने की योजना बनाई है और इस दौरान पश्चिम बंगाल की बहुलवादी पहचान रेखांकित करेंगी।
शुभेंदु अधिकारी के नामांकन के समय अमित शाह ने कहा था,‘‘सामान्य तौर पर, हमें 170 सीटें जीतनी होंगी। लेकिन अगर शुभेंदु बाबू भावानीपुर में ममता बनर्जी को हरा देते हैं, तो ‘परिवर्तन’ अपने आप हो जाएगा।’’
भवानीपुर की लड़ाई प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गई है और यह निर्वाचन क्षेत्र 2026 के विधानसभा चुनावों का प्रतीकात्मक केंद्र बन गया है।
ममता बनर्जी अब अपने ही अंदाज में जवाब देने की तैयारी कर रही हैं। तृणमूल कांग्रेस के सूत्रों के मुताबिक जब मुख्यमंत्री बुधवार को अलीपुर के सर्वे बिल्डिंग में अपना नामांकन पत्र दाखिल करने पहुंचेंगी, तो प्रतीकात्मकता भी उतनी ही सोची-समझी होगी, हालांकि वह स्पष्ट रूप से अलग होगी।
उन्होंने बताया कि राजनीतिक विजय पर केंद्रित संदेश के बजाय,तृणमूल सुप्रीमो चाहती हैं कि उनका नामांकन ही भवानीपुर के मिश्रित सामाजिक सरंचना को प्रतिबिंबित करे।
सूत्रों ने बताया कि जिन लोगों के ममता बनर्जी के नामांकन पत्रों पर हस्ताक्षर करने की संभावना है, उनमें कोलकाता के महापौर और वरिष्ठ मंत्री फिरहाद हकीम की पत्नी रूबी हकीम, वार्ड संख्या71 के तृणमूल ब्लॉक अध्यक्ष बबलू सिंह और भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी के मिराज शाह शामिल हैं।
संदेश बिल्कुल स्पष्ट है, जहां भाजपा इस चुनाव को राजनीतिक परिवर्तन और कथित तुष्टीकरण बनाम राष्ट्रवाद के चुनाव के रूप में पेश कर रही है। वहीं बनर्जी इसे ध्रुवीकरण और बहुलवाद के बीच की लड़ाई के रूप में प्रस्तुत करना चाहती हैं।
तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘‘दीदी चाहती हैं कि नामांकन प्रक्रिया भवानीपुर के सामाजिक ताने-बाने को प्रतिबिंबित करे। यह केवल नामांकन दाखिल करने की बात नहीं है। यह एक संदेश देने की बात भी है कि सभी समुदाय उनके साथ खड़े हैं।’’
राजनीतिक दल अक्सर भवानीपुर को ‘मिनी इंडिया’ के रूप में वर्णित करते हैं। इस निर्वाचन क्षेत्र में बंगाली मध्यमवर्गीय परिवारों के अलावा बड़ी संख्या में मारवाड़ी, गुजराती, पंजाबी, सिख और जैन आबादी रहती है। साथ ही एक बड़ी मुस्लिम आबादी का भी इलाके में निवास है।
आंकड़ों के मुताबिक भवानीपुर में लगभग 42 प्रतिशत मतदाता बंगाली हिंदू हैं, 34 प्रतिशत गैर-बंगाली हिंदू और लगभग 24 प्रतिशत मुस्लिम हैं। वास्तव में, भवानीपुर के लगभग तीन-चौथाई मतदाता हिंदू हैं।
भाषा धीरज माधव
माधव

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