MP High Court on Muslim Marriage: ‘पहली पत्नी रहते मुस्लिम शख्स की दूसरी शादी अपराध नहीं’.. इस मामले को लेकर हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी, ट्रायल कोर्ट में जारी मुकदमे को किया रद्द

'पहली पत्नी रहते मुस्लिम शख्स की दूसरी शादी अपराध नहीं'.. इस मामले को लेकर हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी, MP High Court on Muslim Marriage

MP High Court on Muslim Marriage: ‘पहली पत्नी रहते मुस्लिम शख्स की दूसरी शादी अपराध नहीं’.. इस मामले को लेकर हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी, ट्रायल कोर्ट में जारी मुकदमे को किया रद्द

MP High Court on Muslim Marriage

Modified Date: April 7, 2026 / 11:47 pm IST
Published Date: April 7, 2026 11:47 pm IST

जबलपुर। MP High Court on Muslim Marriage मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि मुस्लिम पुरुष द्वारा पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी करना अपराध नहीं माना जाएगा, क्योंकि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 494 मुस्लिम पुरुषों पर लागू नहीं होती है। अदालत ने इस आधार पर एक मुस्लिम पति के खिलाफ ट्रायल कोर्ट में चल रहा मुकदमा रद्द कर दिया।

MP High Court on Muslim Marriage दरअसल, जब एक महिला ने अपने पति की दूसरी शादी को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी। महिला का आरोप था कि पति ने बिना तलाक दिए दूसरी शादी की है, जो कि अपराध है। महिला ने अपने मुस्लिम पति पर यह भी आरोप लगाया कि वह उसके ऊपर आपसी सहमति से तलाक (खुला) लेने के लिए भी दबाव डाल रहा था. इस पर ट्रायल कोर्ट में मामला चल रहा था। ट्रायल कोर्ट ने व्यक्ति के खिलाफ आरोप तय किए. इस पर व्यक्ति ने पूरे मामले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत पुरुष को एक से अधिक विवाह की अनुमति है, इसलिए इस पर IPC की धारा 494 लागू नहीं होती। दूसरी शादी मुस्लिम पर्सनल लॉ में जुर्म नहीं है।

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