इस्लामिक स्टेट की विचारधारा फैलाने के आरोप में व्यक्ति को 10 साल के कठोर कारावास की सजा

इस्लामिक स्टेट की विचारधारा फैलाने के आरोप में व्यक्ति को 10 साल के कठोर कारावास की सजा

इस्लामिक स्टेट की विचारधारा फैलाने के आरोप में व्यक्ति को 10 साल के कठोर कारावास की सजा
Modified Date: April 27, 2026 / 11:07 pm IST
Published Date: April 27, 2026 11:07 pm IST

नयी दिल्ली, 27 अप्रैल (भाषा) राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की विशेष अदालत ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन ‘इस्लामिक स्टेट’ (आईएसआईएस) के सदस्य मोहम्मद शारिक को आतंकी विचारधारा फैलाने और संगठन के लिए धन जुटाने के मामले में 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।

एनआईए ने सोमवार को एक बयान जारी कर बताया कि बेंगलुरु स्थित एक विशेष अदालत ने शारिक पर 92,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

बयान के अनुसार, शारिक 2022 के मंगलुरु प्रेशर कुकर बम विस्फोट मामले में भी आरोपी है।

बयान के अनुसार, शारिक ने सह-आरोपी सैयद यासीन और एक विदेशी हैंडलर के साथ मिलकर भारत में आईईडी हमलों की साजिश रची थी।

नवंबर 2022 में वह एक ऑटो में प्रेशर कुकर बम लेकर मंगलुरू के मंदिर में विस्फोट की साजिश रच रहा था, लेकिन बम पहले ही फट गया और वह घायल हो गया।।

एनआईए ने बताया कि आरोपी ने फर्जी पहचान पत्र, सिम कार्ड और बैंक खातों का इस्तेमाल कर आतंक का वित्तपोषण किया।

एनआईए की जांच के अनुसार, शारिक ने मैसूरु में एक ठिकाना स्थापित किया था, आईईडी बनाने के लिए कच्चा माल जुटाया था और कर्नाटक के मंगलुरु, दावणगेरे और उडुपी क्षेत्रों में संवेदनशील जगहों की रेकी की थी।

कर्नाटक पुलिस ने मामला दर्ज कर मैसूर स्थित ठिकाने से आईईडी सामग्री बरामद की, जिसके बाद एनआईए ने जांच का जिम्मा लिया और दो लोगों को गिरफ्तार कर बड़े आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश किया।

भाषा

राखी वैभव

वैभव


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