नयी दिल्ली, 20 अगस्त (भाषा) दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) द्वारा तैयार ‘मास्टर प्लान दिल्ली-2047’ में लुटियंस और सिविल लाइंस बंगला क्षेत्रों में मेट्रो गलियारों के किनारे अधिक सघन और तेज विकास गतिविधियों पर रोक लगाने और पुरानी दिल्ली से प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों व खतरनाक कारोबार को हटाने का प्रस्ताव है।
इसके अलावा, राष्ट्रीय राजधानी में हेरिटेज वॉक और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा।
मास्टर प्लान में लुटियंस बंगला जोन और सिविल लाइंस बंगला क्षेत्र की मौजूदा पहचान को संरक्षित करने पर जोर दिया गया है, जिसमें चौड़े मार्ग, बड़े भूखंड, व्यापक हरित क्षेत्र और कम ऊंचाई वाले निर्माण को बनाए रखना शामिल है।
इन क्षेत्रों में मिश्रित भूमि उपयोग, मेट्रो गलियारों के किनारे बेतरतीब तरीके से विकास गतिविधियों और पेड़ों की कटाई की अनुमति नहीं होगी।
मास्टर प्लान में राष्ट्रीय राजधानी के प्रमुख बाजारों, व्यावसायिक सड़कों और ‘मिश्रित उपयोग’ वाली सड़कों की पहचान करने तथा इस क्षेत्र को सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है।
मास्टर प्लान के तहत आवासीय भूखंडों में प्रदर्शन स्थल, छोटे संग्रहालय, पुस्तकालय, कैफे, को-वर्किंग स्पेस, हस्तशिल्प केंद्र और अतिथि गृह जैसी सुविधाओं की अनुमति देने की बात कही गई है।
‘मिश्रित उपयोग’ वाली सड़कों का मतलब है ऐसी सड़कें या सड़क के किनारे के इलाके जहां अलग-अलग तरह की गतिविधियां एक साथ होती हैं।
दिशानिर्देशों के अनुसार, बेड एंड ब्रेकफास्ट (बी एंड बी) इकाइयों को भी अनुमति दी जाएगी।
अधिसूचित विरासत क्षेत्रों में ‘ग्रुप हाउसिंग’ की अनुमति नहीं होगी और वहां स्टिल्ट पार्किंग का अनिवार्य प्रावधान लागू नहीं होगा।
मास्टर प्लान में यातायात प्रबंधन योजना का भी प्रस्ताव दिया गया है।
दिल्ली मास्टर प्लान-2047 में चांदनी चौक समेत राष्ट्रीय राजधानी के इलाकों से गोदाम और थोक कारोबार को शहर के केंद्र से बाहर उपयुक्त स्थानों पर स्थानांतरित करने का प्रस्ताव है।
साथ ही, कनॉट प्लेस के मूल स्वरूप को बनाए रखने पर जोर दिया गया है। मास्टर प्लान में दिल्ली के भीतर माल ढुलाई से होने वाली भीड़भाड़ कम करने के लिए स्थानीय निकाय और सरकार इन गतिविधियों को स्थानांतरित करने के लिए समय-सारिणी तैयार कर सकते हैं।
मास्टर प्लान में ई-कॉमर्स के कारण बढ़ रही छोटी और विकेंद्रीकृत भंडारण सेवाओं का भी उल्लेख किया गया है।
मास्टर प्लान में बताया गया, ‘‘ दिल्ली में गोदाम और थोक कारोबार को उपयुक्त क्षेत्रों में स्थानांतरित किया जाना है। स्थानीय निकाय और सरकार इस स्थानांतरण को सुगम बनाने के लिए समय-सारिणी तैयार कर सकते हैं।’’
इसके अलावा ‘मास्टर प्लान दिल्ली-2047’ के तहत दिल्ली में अधिक किफायती आवास, बेहतर आवासीय इलाकों और किराये के मकानों तक आसान पहुंच उपलब्ध कराने की योजना है।
इसके लिए तीन प्रमुख उपाय सुझाए गए हैं, नए आवासों का निर्माण, मौजूदा आवासीय क्षेत्रों का पुनर्विकास और किफायती किराये के आवास को बढ़ावा देना।
इसके तहत लैंड पूलिंग क्षेत्रों, ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) जोन, कम आबादी वाले क्षेत्रों में नए आवास विकसित करने का प्रस्ताव है।
मास्टर प्लान में सरकारी एजेंसियों और सहकारी समितियों के साथ निजी क्षेत्र की भी महत्वपूर्ण भागीदारी होगी।
मास्टर प्लान के अनुसार, लैंड पूलिंग क्षेत्रों और टीओडी जोन में करीब 30 लाख आवासीय इकाइयां उपलब्ध कराने की क्षमता है।
वहीं कम आबादी वाले क्षेत्रों में सीमित संख्या में आवासीय इकाइयों और सार्वजनिक सुविधाओं के साथ आवास विकास जारी रहेगा।
मकान व जमीन मालिकों, डेवलपर तथा अन्य हितधारकों सहित निजी क्षेत्र की आवास निर्माण और पुनर्विकास में प्रमुख भूमिका होगी, जबकि सरकारी एजेंसियां इसमें सुविधा प्रदान करने वाली भूमिका निभाएंगी।
आवासीय विकास के लिए ‘ग्रुप हाउसिंग’ को प्राथमिकता दी जाएगी।
दीर्घकालिक पहल के तहत 25 से 60 वर्ग मीटर ‘कारपेट एरिया’ वाले छोटे आकार के मकानों के जरिए किफायती आवास को बढ़ावा देने का प्रस्ताव है।
मास्टर प्लान के अनुसार, जमीन की सीमित उपलब्धता को देखते हुए इससे अधिक संख्या में मकान उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
मास्टर प्लान में डीडीए फ्लैट, सहकारी ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों, सरकारी आवास और नियोक्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए आवास समेत मौजूदा नियोजित आवासीय क्षेत्रों के पुनर्विकास का भी प्रस्ताव है।
मास्टर प्लान का उद्देश्य आवासों की गुणवत्ता, बुनियादी ढांचे, सार्वजनिक सुविधाओं और मनोरंजन स्थलों में सुधार करना है।
दिल्ली के नए मास्टर प्लान-2047 में अनधिकृत कॉलोनियों के क्षेत्र-आधारित पुनर्विकास का प्रस्ताव किया गया है। इसके तहत राजधानी के घनी आबादी वाले इलाकों में सड़कों, खुले स्थानों और सार्वजनिक सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए आसपास की बस्तियों को एक साथ विकसित किया जा सकेगा।
दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने बृहस्पतिवार को इस योजना को अधिसूचित किया। इसमें पात्र अनधिकृत कॉलोनियों के पुनर्विकास के लिए एक रूपरेखा दी गई है, जो मौजूदा नियमितीकरण प्रक्रिया के साथ-साथ चलेगी।
इस रूपरेखा के तहत पुनर्विकास योजना किसी डेवलपर, रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) या कॉलोनी अथवा कॉलोनियों के समूह के किसी हिस्से का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिकृत समूह द्वारा प्रस्तावित की जा सकेगी। ऐसी योजना के लिए न्यूनतम क्षेत्रफल 2,000 वर्ग मीटर होगा।
आसपास की कॉलोनियों या उनके कुछ हिस्सों को एकीकृत पुनर्विकास के लिए आपस में जोड़ा जा सकेगा।
वहीं, ‘ग्रुप हाउसिंग’ के लिए अलग-अलग भूखंडों को भी मिलाया जा सकेगा।
योजना के अनुसार, अधिसूचित अनधिकृत कॉलोनी के बाहर की आसपास की जमीन को भी उसके मालिकों की सहमति से योजना में शामिल किया जा सकता है।
हालांकि, ऐसी अतिरिक्त जमीन संबंधित कॉलोनी के चिन्हित क्षेत्रफल के 25 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए।
योजना में सड़क से जुड़ाव के लिए भी नियम तय किए गए हैं।
पुनर्विकास वाले क्षेत्र का कम से कम नौ मीटर चौड़ी सड़क से सीधा जुड़ाव होना जरूरी होगा। जहां ऐसी सड़क उपलब्ध नहीं है, वहां जमीन मालिकों को इसके लिए जरूरी जमीन उपलब्ध करानी होगी।
नई सड़क को कम से कम 12 मीटर चौड़ी मौजूदा सड़क से जोड़ना होगा। पुनर्विकास योजनाओं में अधिकतम 350 का फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) अनुमत होगा। साथ ही, इनमें सार्वजनिक स्थानों और स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक भवन, पुलिस चौकी तथा बाल देखभाल केंद्र जैसी सुविधाओं के लिए भी जगह उपलब्ध करानी होगी।
मास्टर प्लान के अनुसार, दिल्ली की करीब 85 प्रतिशत आबादी निम्न और मध्यम आय वर्ग से आती है।
योजना में पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में अतिक्रमण और अनधिकृत निर्माण के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।
‘दिल्ली मास्टर प्लान-2047’ के तहत ध्वनि प्रदूषण कम करने के लिए प्रमुख सड़कों के किनारे पेड़, मिट्टी के टीले और तटबंध बनाकर हरित पट्टियां विकसित करने जैसे उपाय किए जाएंगे।
दीर्घकालिक रणनीति में शोर कम करने के लिए सड़कों और फुटपाथों के डिजाइन तथा उनकी सतह में इस्तेमाल होने वाली सामग्री में बदलाव का भी प्रस्ताव है।
इसके अलावा, राजधानी में पर्यावरण की दृष्टि से दबाव वाले क्षेत्रों की पहचान की जाएगी।
ये उपाय एमपीडी-2047 में बताई गई पर्यावरण संबंधी रणनीतियों का हिस्सा हैं।
योजना में दिल्ली को ‘‘हरित, जलवायु के अनुकूल और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी राजधानी’’ बनाने की परिकल्पना की गई है, जहां लोगों को बेहतर जीवन-यापन की सुविधाएं और बेहतर पर्यावरण उपलब्ध हो।
इस रणनीति के तहत दिल्ली सरकार द्वारा ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण के लिए एक कार्ययोजना तैयार कर लागू की जाएगी।
इसे समय-समय पर सरकार द्वारा जारी अन्य दिशा-निर्देशों के अनुरूप भी तैयार किया जा सकता है।
इसके अलावा ‘दिल्ली मास्टर प्लान-2047’ में यमुना में गिरने वाले सभी 22 नालों के पानी को सीवेज ट्रीटमेंट, कृत्रिम आर्द्रभूमि (कंस्ट्रक्टेड वेटलैंड्स) और जैव-उपचार (बायो-रिमेडिएशन) के जरिए रोककर उसे उपचारित करने की योजना है।
यह यमुना और उसके बाढ़ क्षेत्र के पुनरुद्धार के लिए प्रस्तावित कई उपायों में शामिल है।
इस योजना में नालों के रोके गए मार्गों को बहाल करने और उन्हें हरित क्षेत्रों तथा बाढ़ क्षेत्र से इस तरह जोड़ने का भी प्रस्ताव है कि लगातार पारिस्थितिक गलियारे विकसित किए जा सकें।
योजना में यमुना और अन्य जलाशयों में बिना उपचारित सीवेज, गंदे पानी, औद्योगिक अपशिष्ट और ठोस कचरे के बहाव पर सख्त रोक लगाने का प्रावधान किया गया है।
ये उपाय ‘दिल्ली मास्टर प्लान-2047’ में शामिल ‘‘यमुना नदी और उसके बाढ़ क्षेत्र के पुनरुद्धार के लिए विशेष पहल’’ का हिस्सा हैं।
योजना के मुताबिक, दिल्ली एक नदी से जुड़ा शहर है और इसका इतिहास व सांस्कृतिक स्वरूप यमुना तथा उसके बाढ़ क्षेत्र से गहराई से जुड़ा है।
भाषा जितेंद्र संतोष
संतोष