सूरत, 20 अगस्त (भाषा) सूरत के एक राजकीय मेडिकल कॉलेज में रैगिंग के कारण एक रेजिडेंट डॉक्टर के खुदकुशी करने के कुछ दिन बाद, गुजरात सरकार ने रैगिंग रोकने में कथित लापरवाही और अनुशासनात्मक कर्तव्यों का पालन न करने के आरोप में एक महिला प्रोफेसर को बृहस्पतिवार को 90 दिन के लिए निलंबित कर दिया।
प्रोफेसर डॉ. सुमैया मुल्ला सूरत के राजकीय मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) के माइक्रोबायोलॉजी विभाग से जुड़ी हुई हैं।
एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानशेरिया के निर्देश पर प्रथम श्रेणी प्रोफेसर डॉ. मुल्ला को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
विज्ञप्ति में कहा गया कि उन्हें रैगिंग की घटना को रोकने में कथित गंभीर लापरवाही और अपने अनुशासनात्मक कर्तव्यों का निर्वहन न कर पाने के कारण 90 दिन के लिए निलंबित किया गया है।
विज्ञप्ति के अनुसार निलंबन अवधि के दौरान डॉ. मुल्ला का मुख्यालय सूरत से लगभग 150 किमी दूर स्थित वडोदरा का राजकीय मेडिकल कॉलेज रहेगा और उन्हें सक्षम नियंत्रक अधिकारी की लिखित अनुमति के बिना वडोदरा को छोड़ने की अनुमति नहीं होगी।
यह कार्रवाई सूरत मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में प्रथम वर्ष के रेजिडेंट डॉक्टर हर्ष पंड्या (30) द्वारा नौ अगस्त को अपने छात्रावास के कमरे में फंदा लगाकर आत्महत्या किए जाने के लगभग दो हफ्ते बाद हुई है।
पुलिस ने बाद में पंड्या और प्रथम वर्ष के अन्य छात्रों की रैगिंग व मानसिक उत्पीड़न में कथित संलिप्तता को लेकर द्वितीय वर्ष के चार रेजिडेंट डॉक्टर के खिलाफ मामला दर्ज किया।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने चेतावनी दी है कि निलंबन अवधि के दौरान डॉ. मुल्ला को कोई भी निजी नौकरी या व्यवसाय करने की अनुमति नहीं होगी। प्रोफेसर पर लगाई गई शर्तों का उल्लंघन करने पर उनका गुजारा भत्ता रोका जा सकता है और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
पंड्या की खुदकुशी के बाद स्वास्थ्य मंत्री ने गुजरात के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेज को अपनी-अपनी एंटी-रैगिंग समितियों और एंटी-रैगिंग दस्तों को तुरंत सक्रिय करने का निर्देश दिया।
पानशेरिया ने जोर देकर कहा कि सभी मेडिकल कॉलेजों को छात्रों के लिए एक सुरक्षित, अनुशासित और भयमुक्त माहौल बनाना होगा।
इससे पहले, सूरत मेडिकल कॉलेज की एंटी-रैगिंग समिति ने द्वितीय वर्ष के चार स्नातकोत्तर छात्रों- निराली वसावे, अनुज माहेश्वरी, दीक्षिता घेवरिया और हीना भूत को पंड्या सहित प्रथम वर्ष के 10 रेजिडेंट डॉक्टरों का कथित उत्पीड़न करने में शामिल पाए जाने के बाद छह माह के लिए निलंबित कर दिया था।
भाषा खारी वैभव
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