एमसीडी सीलिंग: सीआईसी ने मामलों पर नजर रखने के लिए समेकित डेटाबेस बनाने की सिफारिश की

एमसीडी सीलिंग: सीआईसी ने मामलों पर नजर रखने के लिए समेकित डेटाबेस बनाने की सिफारिश की

एमसीडी सीलिंग: सीआईसी ने मामलों पर नजर रखने के लिए समेकित डेटाबेस बनाने की सिफारिश की
Modified Date: September 28, 2026 / 05:27 pm IST
Published Date: September 28, 2026 5:27 pm IST

नयी दिल्ली, 28 सितंबर (भाषा) केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने अनधिकृत निर्माण के लिए सील की गई इमारतों की सील तोड़े जाने या उसके साथ छेड़छाड़ किए जाने को लेकर दर्ज प्राथमिकी पर नजर रखने के लिए समेकित रिकॉर्ड नहीं होने को रेखांकित किया है और ऐसे मामलों की निगरानी के लिए दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) से एक व्यवस्थित तंत्र बनाने की सिफारिश की है।

सीआईसी ने कहा कि इस तरह के रिकॉर्ड के अभाव से वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा प्राथमिकी से जुड़ी कार्रवाई की प्रभावी निगरानी और समय-समय पर समीक्षा ‘काफी हद तक सीमित’ हो जाती है।

सूचना आयुक्त विनोद कुमार तिवारी ने कुरैश नगर में संपत्तियों की सीलिंग, सील हटाने और सील तोड़े जाने या उसके साथ छेड़छाड़ किए जाने से जुड़ी तीन आरटीआई अपीलों की सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।

एमसीडी ने आयोग को बताया कि संबंधित अवधि में 133 संपत्तियों को सील किया गया और पांच संपत्तियों से सील हटाई गई। निगम ने यह भी बताया कि सील तोड़े जाने के मामलों में संबंधित कनिष्ठ अभियंता (जेई) द्वारा प्राथमिकी दर्ज कराई गई।

हालांकि, जब पूछा गया कि क्या कोई समेकित पंजी या अन्य व्यवस्थित रिकॉर्ड रखा जाता है, तो निगम ने ‘स्पष्ट रूप से कहा कि ऐसा कोई रजिस्टर या समेकित रिकॉर्ड नहीं रखा जाता है।’

सीआईसी ने कहा कि इससे वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा प्राथमिकी से संबंधित कार्रवाई की प्रभावी निगरानी और समय-समय पर समीक्षा काफी सीमित हो जाती है। साथ ही, आयोग ने कहा कि यह भी देखा गया कि यह प्रक्रिया काफी हद तक अलग-अलग जेई के विवेक पर निर्भर थी, जिससे ‘एक जैसी प्रक्रिया न होने’ और जवाबदेही की कमी की गुंजाइश बनती है।

भाषा

शुभम दिलीप

दिलीप


लेखक के बारे में