Meenakshi Natarajan Nomination Rejected: मीनाक्षी नटराजन विवाद मामले में बड़ा अपडेट, कांग्रेस ने रिटर्निंग ऑफिसर के खिलाफ SC में की अपील, जानें क्या है पूरा मामला
Meenakshi Natarajan Nomination Rejected:मीनाक्षी नटराजन नामांकन रद्द मामले में कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की है।
Meenakshi Natarajan Nomination Rejected /Photo Credit: Social Media
- मीनाक्षी नटराजन विवाद के बीच आज दिल्ली में कांग्रेस की बड़ी बैठक
- नामांकन रद्द मामले में कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया
- राष्ट्रपति से मुलाकात का समय मांगा, प्रदेशभर में आंदोलन की तैयारी
Meenakshi Natarajan Nomination Rejected: मीनाक्षी नटराजन नामांकन रद्द मामले में कांग्रेस ने अब कानूनी लड़ाई तेज कर दी। पार्टी ने रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की है। साथ ही कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष ने इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखने के लिए राष्ट्रपति से मुलाकात का समय मांगा है। पार्टी के राज्यसभा सांसद विवेक तंखा, अभिषेक मनु सिंघवी समेत सीनियर नेताओं ने तैयारी शुरू कर दी है। बता दें मध्यप्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों पर हो रहे चुनाव में मंगलवार को उस समय नाटकीय मोड़ आ गया, जब शपथपत्र में जानकारी छुपाने के आरोप में कांग्रेस की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया गया।
कांग्रेस की बड़ी बैठक आज
वही, मध्यप्रदेश में राज्यसभा मीनाक्षी नटराजन विवाद के बीच नामांकन के अंतिम दिन आज दिल्ली में कांग्रेस की बड़ी बैठक आयोजित होगी। जिसमें राज्यसभा चुनाव, संगठन, आंदोलनों को लेकर रणनीति बनाई जाएगी। इस बैठक में सभी राज्य के प्रदेश प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष शामिल होंगे। साथ ही मौजूदा हालात को देखते हुए कांग्रेस रणनीति बनाएगी। इस दौरान एमपी के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, प्रभारी हरीश चौधरी भी मौजूद रहेंगे।
मीनाक्षी नटराजन नामांकन रद्द करने पर कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र की हत्या करार देते हुए आरोप लगाया कि यह अब ‘वोट चोरी’ का मामला नहीं रहा, बल्कि ‘सीट चोरी’ का मामला बन गया है। साथ ही पार्टी ने इस प्रकरण को अदालत में चुनौती दी है। कांग्रेस नेताओं और विधायकों ने बुधवार को प्रदेशभर में भूख हड़ताल की और प्रदर्शन किया था।
जीतू पटवारी के नेतृत्व में कांग्रेस ने दिया था धरना
मीनाक्षी नटराजन का नामांकन मामले में कांग्रेस की मध्यप्रदेश इकाई के अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में राज्य की राजधानी भोपाल के रोशनपुरा चौराहे पर वरिष्ठ नेताओं और विधायकों ने धरना दिया।पटवारी ने कहा, इसी कारण भाजपा को आखिरकार संविधान को ताक पर रखकर हमारा नामांकन निरस्त करवाना पड़ा।
उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस की यही एकजुटता भविष्य में मध्यप्रदेश से भाजपा की विदाई का कारण बनेगी। पटवारी ने कहा, ‘‘मोहन यादव जी ने मध्यप्रदेश में लोकतंत्र के साथ जो कुकृत्य किया है, उसे पूरा प्रदेश देख चुका है।’ उन्होंने मुख्यमंत्री को चेतावनी देते हुए कहा, ‘‘मोहन यादव जी, अगली बार उज्जैन से चुनाव मत लड़िए, वरना जनता आपको विपक्ष में बैठाने के लिए भोपाल तक भी नहीं आने देगी।’’ पटवारी ने कहा कि भाजपा इस ‘‘कृत्य’’ के खिलाफ कांग्रेस अगले एक महीने तक सभी जिलों में भाजपा कार्यालयों का घेराव करेगी, भोपाल में मुख्यमंत्री निवास का घेराव करेगी और दिल्ली में सभी विधायकों के साथ राष्ट्रपति भवन तक मार्च भी निकाला जाएगा। उन्होंने कहा, यह लड़ाई रुकने वाली नहीं है।
राज्यसभा की तीन सीट के लिए हो रहे चुनाव में मंगलवार को उस समय नाटकीय मोड़ आ गया, जब शपथपत्र में जानकारी छिपाने के आरोप में मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त कर दिया गया। राज्यसभा चुनाव के निर्वाचन अधिकारी अरविंद शर्मा द्वारा जारी आदेश में कहा गया कि उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के दौरान पाया गया कि नटराजन ने नामांकन पत्र के साथ जमा किए गए फॉर्म-26 में अदालत में लंबित एक शिकायत का उल्लेख नहीं किया था। इस कारण उनका हलफनामा अधूरा माना गया।
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का बड़ा आरोप
पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि राज्यसभा चुनाव में भाजपा ने धनबल और अन्य माध्यमों से विधायकों को प्रभावित करने की कोशिश की, लेकिन जब उसे सफलता नहीं मिली तो नामांकन निरस्त कराने का रास्ता अपनाया गया। उन्होंने कहा, ‘‘कल मध्यप्रदेश में लोकतंत्र की हत्या हुई।’’ अपने लंबे संसदीय अनुभव का उल्लेख करते हुए सिंह ने कहा कि उन्होंने विपक्ष में रहते हुए अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार भी देखी है।
उन्होंने कहा, ‘‘उस समय नियम-कानून का सम्मान था। लोगों को डर रहता था कि नियमों का उल्लंघन करने पर कड़ी कार्रवाई होगी। आज स्थिति यह है कि किसी को नियम, कानून और संविधान की परवाह नहीं है। देश और लोकतंत्र दोनों संकट के दौर से गुजर रहे हैं।’’
कांग्रेस के मध्यप्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग ने भाजपा सरकार के दबाव में काम करते हुए एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत नटराजन का नामांकन खारिज किया है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक मर्यादाओं पर गंभीर प्रहार है।
वहीं, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि भाजपा सरकार के दबाव में झूठ और संगठित षड्यंत्र के जरिए मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त कर लोकतंत्र की हत्या की गई है। उन्होंने कहा कि यह घटना लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक मर्यादाओं और निष्पक्ष चुनावी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

Facebook


